करनाल, [पवन शर्मा]। अब ऑक्‍सीजन की कमी से किसी की जान नहीं जाएगी और जीवनरक्षक प्रणाली के लिए ऑक्‍सीजन का अभाव नहीं रहेगा। हरियाणा में ऐसा सिस्‍टम विकसित किया गया है कि जिससे मरीजों के इलाज के लिए ऑक्‍सीजन की कमी नहीं रहेगी और मुश्किल में फंसी जान को बचाया जा सकेगा। यह है सप्लीमेंट ऑक्सीजन थेरेपी सिस्टम।

अब ऑक्सीजन की उपलब्‍धता में कोई कमी नहीं, आत्मनिर्भर हुए हम

दरअसल, कोरोना संकट ने देश-दुनिया के साथ हरियाणा में भी चिकित्सा सुविधाएं और खासकर जीवन रक्षक प्रणाली विकसित करने की तरफ सबका ध्यान आकृष्ट किया। ऐसे में ऑक्सीजन उपलब्धता को लेकर संशय की स्थिति बनी थी लेकिन अब हरियाणा में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। इसके लिए सप्लीमेंट ऑक्सीजन थेरेपी सिस्टम विकसित किया गया है, जो मेडिकल ऑक्सीजन के साथ इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन भी उपलब्ध कराएगा। राज्य में हिसार और गुरुग्राम के इंडस्ट्रियल प्लांट में बाकायदा इसका ट्रायल किया गया है, जिसकी सफलता के बाद अब करनाल सहित अन्य स्थानों पर भी इसे आजमाया जाएगा।

हिसार और गुरुग्राम के इंडस्ट्रियल प्लांट में हुआ सफल ट्रायल

कोरोना महामारी की महाचुनौती से निपटने के जीतोड़ प्रयास जारी हैं। लेकिन, विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट जल्द नहीं टलेगा। इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज के निदेेशक डाॅ. एसके सरीन व अन्‍य‍ विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस का उच्चतम स्तर जुलाई से मध्य अगस्त में देखने को मिल सकता है। लिहाजा, केंद्र सरकार ने राज्यों को पुख्ता चिकित्सीय प्रबंध करने और खासकर जीवन रक्षक प्रणाली पर बारीकी से ध्यान देने को कहा है।

हरियाणा के राज्य औषधि नियंत्रक नरिंदर आहूजा। 

हरियाणा में यह अहम जिम्मेदारी संभाल रहे राज्य औषधि नियंत्रक (एसडीसी) नरिंदर आहूजा ने जागरण को बताया कि, सप्लीमेंट ऑक्सीजन थेरेपी कोविड-19 रोगियों का क्लीनिक मैनेजमेंट पार्ट है। इसके बूते हरियाणा ही नहीं, पूरे भारत में चिकित्सा उपयोग के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता और आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया इंडस्ट्रियल गैसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने औद्याेगिक ऑक्सीजन निर्माताओं को मेडिकल उपयोग के लिए ऑक्सीजन तैयार करने का प्रस्ताव दिया था, जिसका संज्ञान लेने के साथ ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया डीसीजीआइ ने सप्लीमेंट ऑक्सीजन थेरेपी विकसित करने पर जोर दिया। औद्योगिक संंस्थानों को बाकायदा विनिर्माण लाइसेंस देने की नीति बनाई गई।

राज्य में हिसार व गुरुग्राम स्थित औद्याेगिक परिसरों को चुना गया, जहां औद्योगिक ऑक्सीजन निर्माण संभव है। करनाल व अन्य स्थानों के प्लांटों में भी इसका उत्पादन किया जाएगा। गहन विश्लेषण में पाया गया कि केवल मेडिकल ऑक्सीजन पर निर्भरता उचित नहीं है। आपात स्थिति के लिए इंडस्ट्रीयल ऑक्सीजन का भी प्रयोग करना होगा। दोनों में ज्यादा फर्क भी नहीं है। मेडिकल व इंडस्ट्रीयल ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता के आधार पर अब प्रदेश आत्मनिर्भर हो गया है।   

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नया प्रोटोकॉल तैयार

एसडीसी आहूजा ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय मेडिकल ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है। प्रदेश में सभी अस्पतालों को इसके लिए निर्देशित किया गया है ताकि रोगियों के इलाज में कोई व्यवधान न हो। स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऑक्सीजन आपूर्ति के प्रमुख स्रोतों, ऑक्सीजन प्रणाली के घटकों व ऑक्सीजन की मानक आवश्यकता मात्रा के संचालन से संबंधित नया प्रोटोकॉल भी तैयार किया है। इसके तहत शीर्ष दवा नियामक ने 24 घंटे में औद्योगिक ऑक्सीजन के निर्माताओं को अपेक्षित मंजूरी देने को कहा है।

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मरीजों के स्‍वास्‍थ्‍य व सुरक्षा से समझौता नहीं

एसडीसी ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया में मरीजों के स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है और चयनित प्लांटों में भारतीय फार्माकोपिया के मानकों व नियमों के अनुसार तथा लेबलिंग आवश्यकताओं के अनुपालन में ऑक्सीजन निर्माण किया जा रहा है। दरअसल, कोरोना रोगियों के इलाज के लिए ऑक्सीजन के उपयोग में खास सावधानी के साथ इसकी आपूर्ति में उपकरणों को उसी कीटाणुशोधन उपचार की आवश्यकता होती है, जैसा अस्पताल में अन्य मशीनरी और सतहों को दिया जाता है।

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