चंडीगढ़ [शंकर सिंह]। अमूूमन रंगों और पेेंसिल से बने पोट्रेट सुने हैं। हॉकी स्टिक से भला पोट्रेट कैसे बन सकता है। जालंधर के आर्टिस्ट वरुण टंडन ने ऐसा ही किया। उन्होंने हॉकी के टुकड़े जोड़-जोड़ कर गोल मास्टर बलबीर सिंह सीनियर का पोट्रेट तैयार किया था। इस पोट्रेट को उन्होंने एक दिन में तैयार किया, बतौर वरुण जब वह इसे गिफ्ट करने के लिए बलबीर सिंह सीनियर के घर गए तो उन्होंने उनका स्वागत दिल से किया।

वरुण ने कहा कि मुझे लगा ही नहीं कि मैं एक लैजेंड के साथ खड़ा हूं, उन्होंने मुझे इतने प्यार से घर में बिठाया, मुझसे इस पोट्रेट से जुड़ी बातें की। वरुण ने कहा कि सीनियर ने उन्हें अपने परिवार से मिलवाया, साथ ही हॉकी से जुड़े अपने दिलचस्प किस्से भी सुनाए। इसके बाद उन्होंने ये भी बताया कि वह कुछ समय जालंधर भी रहे, जालंधर में बीते दिन और फिर चंडीगढ़ में बसना, उन्होंने एक एक किस्सा खूबसूरती से सुनाया।

हॉकी के टुकड़ों को इस तरह जोड़कर बनाया था पोट्रेट।

वरुण बोले कि जाते हुए सीनियर ने उन्हें अपनी ऑटोबायोग्राफी भेंट की, साथ ही सीनियर ने इस पोट्रेट को अपने मेन हॉल में लगाया। वरुण ने कहा कि इतने बड़े खिलाड़ी होने के बावजूद उन्होंने इसका एक बार भी मुझे इल्म नहीं होने दिया। वो बाहर तक छोड़ने आए, तो अपने हाथों से धन्यवाद करने लगे। इतने महान इंसान का जाना बहुत दुख देत है, उन्होंने मुझे एक और पोट्रेट बनाने को कहा था, जिसकी शायद स्टैंप भी बननी थी, लेकिन अफसोस उनकी खराब हालत के बाद उनसे दोबारा मिल नहीं पाया।

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