लापरवाही की सीमा पार: जीएमडीए-बिल्डर के बीच तालमेल की कमी से एम3एम मरीना के 1000 परिवार परेशान
नया गुरुग्राम के सेक्टर-68 स्थित एम3एम मरीना सोसायटी के करीब एक हजार परिवार बिजली संकट से जूझ रहे हैं। जीएमडीए के बरसाती नाले की खुदाई के कारण 33 केवी ...और पढ़ें
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बरसाती नाले की खुदाई के दौरान बीच में आई 33 केवी क्षमता की भूमिगत बिजली केबल। जागरण
जागरण संवाददाता, नया गुरुग्राम। शहर में बुनियादी ढांचे के विकास और निजी बिल्डरों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा एक बार फिर आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सेक्टर-68 स्थित एम3एम मरीना सोसायटी के करीब एक हजार परिवारों के सामने गंभीर बिजली संकट खड़ा हो गया है। इसका मुख्य कारण 33 केवी क्षमता की भूमिगत बिजली केबल है जो जीएमडीए द्वारा बनाए जा रहे मुख्य बरसाती नाले की खुदाई के बीच आ गई है। इस केबल को स्थानांतरित करने के नाम पर सोसायटी की रखरखाव एजेंसी ने निवासियों से करीब 20 लाख रुपये की मांग कर दी है, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है।
बता दें कि करीब तीन महीने पहले जीएमडीए ने सेक्टर-68 से सेक्टर-75 तक मुख्य बरसाती नाला डालने के लिए टेंडर जारी किया। जब ठेकेदार ने सेक्टर-68 और 70ए को जोड़ने वाली मुख्य सड़क के साथ खुदाई शुरू की, तो 33 केवी की भूमिगत बिजली केबल खुदाई के बीच आ गई। पिछले सप्ताह जेसीबी से खोदाई के दौरान केबल क्षतिग्रस्त भी हो गई, जिससे करीब सात घंटे तक सोसायटी की बिजली आपूर्ति बाधित रही। अब रखरखाव एजेंसी का कहना है कि सुरक्षा कारणों से केबल को स्थानांतरित करना अनिवार्य है, जिस पर करीब 20 लाख रुपये का खर्च आएगा।
सवालों के घेरे में बिल्डर और विभाग
निवासियों का कहना है कि यदि बिजली केबल बिछाने से पहले जीएमडीए और डीएचबीवीएन से अनुमति ली गई थी, तो फिर नाले की योजना बनाते समय इसका ध्यान क्यों नहीं रखा गया। वहीं यदि अनुमति नहीं ली गई थी, तो इसकी जिम्मेदारी बिल्डर की बनती है। ऐसे में इस लापरवाही का आर्थिक बोझ सोसायटी के निवासियों पर डालना पूरी तरह गलत है। लोगों का यह भी कहना है कि बिजली कटौती की स्थिति में सोसायटी को जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ता है, जहां बिजली की लागत 28 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच जाती है।
आरडब्ल्यूए का आरोप
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष राखी सिंह, उपाध्यक्ष शीला शर्मा और महासचिव अंकुर सेठी का कहना है कि अधिकारियों और बिल्डर की आपसी चूक की सजा निवासियों को नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार पक्ष तय करने की मांग की है। साथ ही जीएमडीए के ठेकेदार पर लापरवाही से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे भविष्य में केबल कटने का खतरा बना हुआ है।
"मुख्य सड़क से सटी जमीन में भूमिगत बिजली केबल डालने के लिए बिल्डर को जीएमडीए से अनुमति और कब्जा लेना होता है। इसमें डीएचबीवीएन की कोई भूमिका या गलती नहीं है।"
-वीके अग्रवाल, मुख्य अभियंता, बिजली निगम
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