कभी चावल बेचता था वो मुस्लिम हीरो, फिर बना बजरंग बली का भक्त; ब्लॉकबस्टर फिल्मों की लगाई झड़ी
एक ऐसा बॉलीवुड स्टार जो कभी गुजारा करने के लिए चावल भी बेचा करता था। जब वह सिनेमा में आया तो चार्मिंग पर्सनैलिटी से दर्शकों का दिल चुरा लिया। इस एक्टर ...और पढ़ें

चावल बेचकर गुजारा कर चुका है ये बॉलीवुड स्टार। फोटो क्रेडिट- एक्स
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। सिनेमा का एक ऐसा कलाकार जो भाई के नक्शेकदम पर चलकर अभिनय की दुनिया में आया और न केवल अभिनय से दिल जीता बल्कि अपने निर्देशन और फिल्मों के निर्माण की समझ से पूरी इंडस्ट्री में छा गया। कद-काठी और रूप-रंग के चलते वह लाखों लड़कियों के दिलों पर राज करते थे। जब वह फिल्मों में आए तो सपोर्टिंग रोल में ही सबका ध्यान खींच लिया था।
कर्नाटक से आया ये अभिनेता इंडस्ट्री में इतना पॉपुलर हुआ कि आज भले ही वह बड़े पर्दे पर न दिखें, लेकिन अपनी अमिट छाप के लिए हमेशा सराहे जाते हैं। हालांकि, उन्हें आसानी से कामयाबी हासिल नहीं की। इसके लिए उन्होंने काफी मशक्कत भी की, मगर सिर्फ अभिनय नहीं बल्कि बिजनेस में भी। इस अभिनेता ने अभिनय के साथ-साथ चावल बेचने का भी काम किया।
सपोर्टिंग रोल से छाए थे अभिनेता
जिस अभिनेता की हम बात कर रहे हैं, वो कोई और नहीं बल्कि फिरोज खान के भाई संजय खान हैं। 3 जनवरी 1940 को जन्मे संजय भाई के नक्शेकदम पर चलकर फिल्मों में आए थे और 1964 में फिल्म दोस्ती से अभिनय करियर की शुरुआत की थी। फिर हकीकत में बतौर लीड डेब्यू कर उन्होंने इंडस्ट्री में पैर जमाना शुरू किया और फिर दस लाख, एक फूल दो माली, इंतकाम, ढूंढ जैसी तमाम फिल्मों में काम किया।
डायरेक्शन में भी संजय खान का कमाल
अभिनय के साथ-साथ संजय खान ने डायरेक्शन और प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाया और दिलचस्प बात यह रही कि इसमें भी उन्हें सफलता हासिल हुई। वह काला धंधा गोरे लोग, अब्दुला, चांदी सोना जैसी फिल्मों को डायरेक्ट कर चुके हैं। उन्होंने टीवी शो टीपू सुल्तान को भी डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया। इसके अलावा उन्होंने जय हनुमान, जय महाभारत, 1857 क्रांति जैसे शोज भी बनाए।
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संजय खान कैसे बने हनुमान भक्त
बहुत कम लोग जानते हैं कि मुस्लिम होते हुए भी संजय खान को बजरंग बली का बहुत बड़ा भक्त कहा जाता है। इसके पीछे की कहानी बहुत दिलचस्प है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक बार टीपू सुल्तान की शूटिंग के दौरान आग लगने की वजह से संजय खान घायल हो गए थे और 13 महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहे थे। उस वक्त एक हनुमान मंदिर के पुजारी ने उनके लिए पूजा रखी थी और उनके ठीक होने की मन्नत मांगी थी। उस वक्त से ही संजय खन्ना हनुमान जी के भक्त बन गए थे।
क्यों चावल बेचते थे संजय खान?
बात करें संजय खान के चावल बेचने की तो वह बिजनेस में भी आगे रहे हैं। 80 के दशक में अभिनय, डायरेक्शन के साथ-साथ वह चावल का भी कारोबार करते थे। वह मध्य पूर्वी देशों से चावल एक्सपोर्ट करते थे। बिजनेस के बीच उन्होंने साल 2003 में आखिरी बार महारथी कर्ण बनाई थी। इसके बाद से ही वह इंडस्ट्री से दूर हैं।

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