अल्‍मोड़ा, ओपी अवस्‍थी : अल्मोड़ा संसदीय सीट 1957 में बनी। तब से आज तक इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा का ही कब्जा रहा है। नौ बार कांग्रेस तो सात बार भाजपा जीती है। सीट से सबसे पहले चुने जाने वाले सांसद जंग बहादुर सिंह बिष्ट थे। दूसरे सांसद प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. हरगोंविद पंत रहे हैं।

अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र वर्ष 1957 से अस्तित्व में है। 1998 तक इस संसदीय क्षेत्र में मात्र दो जिले अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ आते थे। 1998 में अल्मोड़ा से बागेश्वर और पिथौरागढ़ से चम्पावत अलग जिले बन गए। संसदीय क्षेत्र के लिहाज से दोनों नए जिले भी इसी का हिस्सा बने रहे। साथ ही संसदीय क्षेत्र को अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय क्षेत्र के नाम से जाना गया। अल्मोड़ा सीट से दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी 1977 में जनता पार्टी के टिकट से चुनाव लड़ा और जीता। वहीं पूर्व सीएम हरीश रावत ने यहां से जीत की हैट्रिक लगाई तो भाजपा के वरिष्ठ नेता बची सिंह रावत ने लगातार चार चुनाव जीतकर न केवल हरीश रावत का राजनीतिक कॅरियर प्रभावित किया, बल्कि खुद भी केंद्रीय राज्यमंत्री का ओहदा भी हासिल किया।

1991 से सीट का राजनीतिक परिदृश्य बदल
अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र में कब कौन जीता
वर्ष            प्रत्याशी                      दल
1957        जंग बहादुर बिष्ट          कांग्रेस
1960         हर गोविंद पंत             कांग्रेस
1962        जंगबहादुर बिष्ट           कांग्रेस
1967        जंगबहादुर बिष्ट           कांग्रेस
1971        नरेंद्र बिष्ट                   कांगे्रस
1977     डा. मुरली मनोहर जोशी    जनता पार्टी
1980       हरीश रावत,                  कांग्रेस
1984       हरीश रावत                   कांग्रेस
1989       हरीश रावत                   कांग्रेस
1991       जीवन शर्मा                   भाजपा
1996      बची सिंह रावत               भाजपा
1998       बची सिंह रावत              भाजपा
1999       बची सिंह रावत              भाजपा
2004        बची सिंह रावत             भाजपा            
2009       प्रदीप टम्टा                   कांग्रेस
2014       अजय टम्टा                  भाजपा

गांव बहुल है अल्मोड़ा सीट का सामाजिक तानाबाना
अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय क्षेत्र का सामाजिक तानाबाना गांव बहुल है। यहां जातिगत आधार पर क्षत्रिय वोटर पहले तो ब्राह्मण दूसरे स्थान पर हैं। हालांकि संसदीय क्षेत्र में जाति के आधार पर मतदान का प्रभाव न के बराबर रहता है। पर्वतीय तीन जनपदों के अधिकांश विस क्षेत्रों में पुरुष मतदाताओं से अधिक संख्या महिला मतदाताओं की है। जिसका मुख्य कारण अधिकांश पुरु षों के कार्य के चलते दूसरे राज्यों या मैदानी जिलों में रहना है। पिथौरागढ़ जिले में लिंगानुपात में आए अंतर के चलते यहां की तीन सीटों पिथौरागढ़, डीडीहाट और धारचूला में महिला मतदाताओं की सख्या अधिक है। सम्पूर्ण संसदीय क्षेत्र में पुरुष मतदाता 51.1 फीसद और महिला मतदाता 48.99 फीसद हैं।

अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र के अनुमानित जातिगत आंकड़े
राजपूत                         44 फीसद
ब्राह्मण                        29 फीसद
एससी/एसटी व अन्य      27 फीसद

ग्रामीण बहुल है अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र
अल्मोड़ा- पिथौरागढ़ लोकसभा क्षेत्र ग्रामीण बहुल क्षेत्र है। 2017 के आंकड़ों के अनुसार इस सीट पर 88 फीसद क्षेत्र ग्रामीण 11 फीसद क्षेत्र शहरी है। संसदीय क्षेत्र में धारचूला-मुनस्यारी, और डीडीहाट विस क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति के लोग निवास करते हैं।

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Posted By: Skand Shukla

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