Chhindwara Seat:'....44 साल का रिश्ता है हमारा', रुठों को मनाने और 'नाथ' की साख बचाने को मैदान में सास-बहू
मध्य प्रदेश की एकमात्र लोकसभा सीट छिंदवाड़ा ही कांग्रेस के पास है जिस पर कब्जा जमाने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी। कांग्रेस ने नकुलनाथ को तो भाज ...और पढ़ें

धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। मध्य प्रदेश में पहले चरण के नामांकन की प्रक्रिया समाप्त होते ही प्रचार ने जोर पकड़ लिया है। प्रदेश की हॉट सीट छिंदवाड़ा पर कब्जा बरकरार रखने के लिए पूरा नाथ परिवार मैदान में उतर आया है। कांग्रेस प्रत्याशी नकुल नाथ को जिताने के लिए बहू प्रिया नाथ के साथ उनकी मां अलका नाथ ने भी मोर्चा संभाल लिया है।
सास-बहू शहर से गांव तक उन परिवारों में दस्तक देकर अपने 44 साल के रिश्तों की याद दिला रहे हैं, जिनके घर के लोग कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए हैं। कमल नाथ के सबसे करीबी दीपक सक्सेना को भी भाजपा में जाने से रोकने में अलका ने ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चुनावी मैदान में भले ही नकुल नाथ हैं, लेकिन प्रतिष्ठा कमल नाथ की दांव पर लगी है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की एकमात्र लोकसभा सीट छिंदवाड़ा ही कांग्रेस के पास है, जिसे छीनने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। पहले चरण के चुनाव में प्रदेश की सीधी, शहडोल, मंडला, जबलपुर, बालाघाट लोकसभा सीटें भी शामिल हैं, जहां 19 अप्रैल को मतदान होना है।
71 वर्ष से कांग्रेस का कब्जा
छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर नाथ परिवार का कब्जा पिछले 44 वर्ष से है। बीते वर्षों में एक उपचुनाव को छोड़ दिया जाए तो यह सीट पिछले 71 वर्ष से कांग्रेस के खाते में रही है। यहां जीत दर्ज करने की मंशा के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आए, गिरिराज सिंह को संसदीय सीट का प्रभारी बनाया गया और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भाजपा की सदस्यता दिलाई गई।
दीपक सक्सेना को मनाने में सफल रहीं अलका
कमल नाथ के भरोसेमंद पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना को लेकर बुधवार को अटकलें थीं कि वे भाजपा में शामिल हो सकते हैं, लेकिन यह कयास ही साबित हुए। सक्सेना के एक बेटे अजय भाजपा में आ चुके हैं, इसलिए मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद सिंह पटेल समेत वरिष्ठ नेता सक्सेना को मनाने उनके घर भी पहुंचे।
बात नहीं बनी तो इसे शिष्टाचार भेंट बताया। दीपक सक्सेना ने भी कहा कि वे भाजपा में नहीं गए हैं और कमल नाथ के साथ हैं। हालांकि, सक्सेना ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।
गांव से शहर तक संपर्क
अलका नाथ और बहू प्रिया प्रमुख कार्यकर्ताओं के घर जाकर नाराजगी दूर कर रही हैं तो गांव-गांव जाकर महिलाओं का समर्थन भी जुटा रही हैं। पिछले दिनों बहू प्रिया तो ग्रामीण महिलाओं से मिलने खेत जा पहुंचीं, जहां सिर पर घूंघट लिए प्रिया भी गेहूं की कटाई करने बैठ गईं।
आदिवासी बहुल इस सीट में सास-बहू की जोड़ी बेहद लोकप्रिय हो रही है। छिंदवाड़ा से भाजपा प्रत्याशी बंटी साहू वर्ष 2019 में विधानसभा का उपचुनाव कमल नाथ से हार चुके हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में भी नाथ के विरुद्ध बंटी थे और पराजित हुए।
सीएम बोले- खेल रहे भावुकता का खेल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को छिंदवाड़ा में कहा था,'' जो लोग कहते हैं कि छिंदवाड़ा इसका या उसका गढ़ है तो यह किसी का गढ़ नहीं है, गड़बड़ है। ये खुद को हनुमान भक्त बताते हैं, अगर वास्तव में हनुमान भक्त हैं तो जाम सांवली के हनुमान मंदिर में एक ईंट क्यों नहीं लगाई?''
आप केंद्र में मंत्री रहे, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, कौन सा पद आपको नहीं मिला, फिर भी चुनाव में भावुकता के आधार पर बेवकूफ बनाने का खेल चल रहा है। 44 सालों के बाद भी अगर वोट मांगने के लिए रोना पड़ रहा है, तो डूब मरो।
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CM ने किया छिंदवाड़ा वासियों का अपमान
इधर, सीएम के बयान के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने भाजपा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर छिंदवाड़ावासियों का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री छिंदवाड़ा आकर कहते हैं कि यहां सब गड़बड़ है। यह छिंदवाड़ा की अस्मिता के साथ खिलवाड़ है।
कमलनाथ ने कहा, ''मुख्यमंत्री जी आप छिंदवाड़ा के आदिवासी समाज, मेहनतकश नौजवान, माताओं-बहनों, मजदूरों और किसानों को गड़बड़ कह रहे हैं। छिंदवाड़ा के इस अपमान के लिए आपको तत्काल जनता से माफी मांगनी चाहिए। हालांकि, इस कृत्य के लिए छिंदवाड़ा की जनता आपको कभी माफ नहीं करेगी।''

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