नई दिल्ली। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिल्ली के अनुभवी नेता सुभाष चोपड़ा पर भरोसा जताते हुए उन्हें प्रदेश कांग्रेस की कमान तो सौंप दी है, लेकिन उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पार्टी भयंकर गुटबाजी से जूझ रही है और इसलिए काफी कमजोर भी पड़ चुकी है। विधानसभा चुनाव में भी अब काफी कम समय रह गया है। ऐसे में क्या होगी पार्टी की रणनीति, कैसे दूर होंगी कमजोरियां और किस तरह पार्टी दिल्ली के सियासी समर में उतरेगी। ऐसे ही कुछ सवालों के साथ संजीव गुप्ता ने प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा के साथ लंबी बातचीत की। प्रस्तुत हैं मुख्य अंश :-

सवालः अध्यक्ष के तौर पर आपकी प्रमुख प्राथमिकताएं क्या हैं?

जवाबः मेरी प्राथमिकता पूरी कांग्रेस को एकजुट करना और विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करना है। मुख्यमंत्री अर¨वद केजरीवाल खोखली नारेबाजी कर दिल्ली की जनता को बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें भी एक्सपोज करना है।

सवालः दिल्ली का सियासी माहौल कैसा है?

जवाबः दिल्ली का सियासी माहौल इस समय तेजी से कांग्रेस के पक्ष में बन रहा है। केंद्र की भाजपा और दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार से दिल्लीवासी बहुत ही नाराज हैं। दोनों ने ही एक- दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप में ही अपना सारा शासनकाल निकाल दिया। किसी ने भी अपने घोषणा पत्र के वायदे तक पूरे नहीं किए। दिल्ली का विकास भी मानो ठहर सा गया है। न कोई नया स्कूल बन पाया, न अस्पताल। पीने के पानी की किल्लत तक दूर नहीं पाई। प्रदूषण की समस्या दिल्ली के लिए नासूर बन गई है। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बद से बदहाल है। लिहाजा, हर दिल्लीवासी कांग्रेस के शासनकाल को याद कर रहा है और कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने की तैयारी कर रहा है।

सवालः कांग्रेस का जो वोट बैंक आप की तरफ खिसक गया था, क्या इस चुनाव में लौटेगा?

जवाबः मेरा मानना है कि वोट बैंक कुछ नहीं होता। जनता अपने विश्वास की कसौटी पर वोट करती है, जो दल जनता का विश्वास बनाए रखता है। उसे फिर से सत्ता मिल जाती है और जो विश्वास तोड़ देता है, उसे अर्श से फर्श पर आने में भी देर नहीं लगती। कमोबेश ऐसा ही दिल्लीवासियों के साथ आप और भाजपा ने किया है। भाजपा ने जहां दिल्लीवासियों को रोजगार देने के बजाय सीलिंग के जरिये उनका पुराना रोजगार भी छीन लिया। वहीं दिल्ली में आप की सरकार बनाकर तो दिल्लीवासी वैसे भी स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि जब इन दलों के नेता और कार्यकर्ता ही वहां से पलायन कर रहे हैं, तब मतदाताओं का तो कांग्रेस के पास लौटकर आना स्वाभाविक ही है।

सवालः  पार्टी में गुटबाजी पर क्या कहना है? क्या इससे नुकसान नहीं होगा?

जवाबः मैं नहीं मानता कि पार्टी में कोई गुटबाजी है। वैचारिक मतभेद मानवीय स्वभाव का हिस्सा है। वैसे भी कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है। सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है। फिर मेरा किसी से कोई मतभेद नहीं है। सभी मेरे साथ हैं और सभी पार्टी की मजबूती के लिए काम करेंगे।

सवालः क्या शीला दीक्षित के विकास का कांग्रेस को फायदा मिलेगा?

जवाबः बिल्कुल चलेगा जनाब। 15 साल के शानसकाल में मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने दिल्ली का इतना विकास किया है कि हर व्यक्ति उन्हें पसंद करता, याद करता है। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके काम हर किसी को उनकी याद दिलाते हैं।

सवालः आप और भाजपा विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट चुके हैं, जबकि कांग्रेस खामोश है, उनसे कैसे मुकाबला करेंगे?

जवाबः कांग्रेस और उसके नेता- कार्यकर्ता पूरे साल काम करते हैं और जनता के सीधे संपर्क में रहते हैं। इसीलिए जनता भी उन पर भरोसा करती है। आप देखते जाइए, कांग्रेस का कुछ समय का प्रचार भी आप और भाजपा पर भारी पड़ेगा।

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Posted By: Mangal Yadav

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