नई दिल्ली। क्रिकेटर से राजनेता बने कीर्ति आजाद को प्रदेश कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। करीब 25 वर्ष भाजपा में रहे कीर्ति इसी साल फरवरी में कांग्रेस का हिस्सा बने थे। दरभंगा से दो बार सांसद रहे कीर्ति दिल्ली की राजनीति से भी अनजान नहीं हैं। 1993 से 1998 तक वह गोल मार्केट विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रह चुके हैं। ऐसे में वह अब दिल्ली में कांग्रेस का ग्राफ किस तरह ऊपर उठाएंगे, कैसे पूर्वाचल के मतदाताओं को साधेंगे और किस रणनीति के तहत दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को त्रिकोणीय मुकाबले का हिस्सा बनाएंगे। ऐसे ही कुछ सवालों को लेकर संजीव गुप्ता ने कीर्ति आजाद से लंबी बातचीत की है। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के मुख्य अश:

सवालः आप प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बनने जा रहे थे, फिर पासा पलट कैसे गया?

जवाबः - इस पर कुछ नहीं कहना चाहूंगा। आलाकमान ने जो उचित समझा, वह निर्णय लिया। मुझे जो भी जिम्मेदारी दी है, मैं उसे पूरी मेहनत से पूरा करूंगा।

सवालः दिल्ली के चुनावी मुकाबले में पार्टी कहीं नजर ही नहीं आ रही। गुटबाजी भी अपने चरम पर है। कैसे संभालेंगे?

जवाबः  मैं किसी गुट में नहीं हूं, न ही किसी गुटबाजी से इत्तेफाक रखता हूं। मैं खुद काम करने वाला नेता हूं और उम्मीद करता हूं कि मेरी टीम में सभी नेता-कार्यकर्ता भी काम करेंगे। जहां तक चुनावी मुकाबले की बात है तो दिल्ली में जितना भी विकास हुआ है, सब शीला दीक्षित के समय में कांग्रेस सरकार ने ही किया है। दिल्लीवासियों को केवल इस सबकी याद दिलाने की जरूरत है। दिल्लीवासी समझ चुके हैं कि विकास क्या होता है और विकास के नाम पर बयानबाजी, विज्ञापनबाजी और फर्जीवाड़ा क्या होता है।

सवालः  हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सफलता का दिल्ली पर कितना असर होगा?

जवाबः निस्संदेह असर होगा। दिल्ली में भी कांग्रेस बेहतर करेगी। मेरा तो मानना है कि दिल्ली में कांग्रेस एक बार फिर से सफलता का इतिहास दोहराएगी। केजरीवाल सरकार ने अपने पांच साल में ऐसा कोई काम नहीं किया, जिसे वह अपना कह सकें। प्रदेश भाजपा में तो यही नहीं पता चलता कि उनका नेता कौन है।

सवालः पूर्वांचल के मतदाताओं को कैसे साधेंगे?

जवाबः पूर्वाचल के मतदाता अच्छे से जान चुके हैं कि आप और भाजपा ने किस तरह से उनको ठगा हैं। मनोज तिवारी पूर्वांचल के लोगों को घुसपैठिया अपराधी एवं दोषी मानते हैं, जबकि अर¨वद केजरीवाल कहते हैं कि पूर्वांचल के लोग 500 रुपये लेकर आते हैं और लाखों का इलाज करवाते हैं। दोनों दल वोट लेने के नाम पर पूर्वाचल का गुणगान करते हैं और बाद में वहीं के लोगों को अपमानित करने से भी पीछे नहीं रहते। वैसे भी दिल्ली देश की राजधानी है और सभी की है। यहां पर उनका भी उतना ही हक है, जितना बाकी लोगों का है।

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Posted By: Mangal Yadav

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