नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। दिल्ली कांग्रेस का अध्यक्ष कौन होगा अभी भी सस्पेंस बरकरार है। शुक्रवार को होने वाले एलान को फिलहाल कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली कांग्रेस (Delhi Congress) के नए अध्यक्ष के लिए पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद (former cricketer kirti azad) के नाम पर सहमति बन चुकी है। लेकिन सोनिया गांधी के निर्देश पर औपचारिक घोषणा शुक्रवार को रोकी दी गई। संदीप दीक्षित प्रकरण में पार्टी आलाकमान को महसूस हुई बगावत की आशंका के बाद कांग्रेस ने ये फैसला लिया।

बता दें कि संदीप दीक्षित ने मां शीला दीक्षित की मौत के लिए दिल्ली कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कानूनी कार्रवाई की भी चेतावनी दी है। अटकलें लग रही हैं कि दिल्ली कांग्रेस में चल रही गुटबाजी को रोकने के लिए पार्टी प्रदेश के बाहर से किसी नेता को यह जिम्मेदारी सौंप सकती है। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के निधन के बाद से यह पद खाली चल रहा है। 

कीर्ति आजाद के नाम पर सोनिया ने लगाई मुहर

सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार शाम दिल्ली प्रदेश प्रभारी पीसी चाको ने एक नोट तैयार करके पार्टी आलाकमान के पास साइन करने के लिए कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के पास भेज दिया। बताया जा रहा है कि पीसी चाको के नोट में सिर्फ दो नाम थे। सबसे पहले कीर्ति आजाद और दूसरे नंबर पर सुभाष चोपड़ा का नाम था, लेकिन सोनिया गांधी ने कीर्ति आजाद के नाम पर मुहर लगाई।

दिल्ली के नेताओं ने किया विरोध

बताया जा रहा है कि कीर्ति आजाद का नाम फाइनल हो गया है। आजाद के नाम पर दिल्ली कांग्रेस के कई नेताओं ने आपत्ति जाहिर की है। कुछ नेताओं ने प्रदेश प्रभारी पीसी चाको और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को अपनी राय से अवगत भी करा दिया है। विरोध करने वाले नेताओं का कहना है कि नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव दिल्ली के ही नेताओं में से होना चाहिए। दिल्ली कांग्रेस के नेताओं ने साफ कर दिया था कि उन्हें दिल्ली के बाहर के किसी भी नेता का नेतृत्व स्वीकार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के नेताओं के पुरजोर विरोध के बावजूद सोनिया गांधी ने कीर्ति आजाद पर मुहर लगाई है।

दिल्ली से है कीर्ति आजाद का नाता

विश्व कप विजेता क्रिकेट टीम के सदस्य रहे कीर्ति आजाद ने अपना राजनीति करियर साल 1993 में भाजपा से शुरू किया था। भाजपा के टिकट पर उन्होंने दिल्ली की गोल मार्केट विधानसभा सीट पर 1993 में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। भाजपा ने दूसरी बार फिर कीर्ति आजाद को 1998 में गोल मार्केट से उतारा लेकिन उन्हें शीला दीक्षित ने हरा दिया। इसके बाद साल 2009 में कीर्ति आाजाद बिहार की दरंभगा से लोकसभा सीट से जीत दर्ज करके संसद पहुंचने में कामयाब रहे। इसके बाद उन्होंने भाजपा के टिकट पर फिर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 

दिवंगत पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली पर आरोप लगाने के बाद भाजपा ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके बाद कीर्ति आजाद ने 18 फरवरी 2019 को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस ने दरंभगा की बजाय धनबाद से उन्हें टिकट दिया लेकिन वे हार गए।

 

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Posted By: Mangal Yadav

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