मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। गोस्वामी तुलसीदास जी ने प्रभु श्रीराम को संपूर्ण चराचर जगत को प्रकाशित करने वाला परम प्रकाश बताया है। दीपोत्सव उसी दिव्य आलोक और सांस्कृतिक चेतना के अनुभव का महापर्व है।

अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन उस पावन परंपरा को जीवंत करता है, जब 14 वर्ष के वनवास के उपरांत प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने पर अवधपुरी दीपों से आलोकित हुई थी। यह हमारी सभ्यता के उस शाश्वत विश्वास का उद्घोष है, जिसमें सत्य, धर्म और मर्यादा का प्रकाश सदैव सर्वोपरि रहा है। अयोध्या धाम 10वें दीपोत्सव के स्वागत के लिए सज्जित है। यह महोत्सव भारत की सनातन चेतना और सांस्कृतिक स्वाभिमान का वैश्विक उत्सव बन चुका है।

2017 में जब उत्तर प्रदेश की जनता-जनार्दन के आशीर्वाद से हमें सेवा का दायित्व मिला, तब अंतर्मन में एक ही कौतूहल और संकल्प था कि कैसा रहा होगा वह क्षण, जब 14 वर्षों के वनवास और अधर्म के संहार के उपरांत प्रभु श्रीराम, माता जानकी और भ्राता लक्ष्मण के साथ अपनी जन्मभूमि लौटे होंगे! उस दिन अवध के नर-नारियों ने सुध-बुध बिसराकर किस उल्लास के साथ हर डगर, हर चौखट और हर देहरी को दीपों से सजाया होगा! त्रेता की उस अयोध्या का प्रत्यक्ष दर्शन तो हमने नहीं किया, किंतु प्रभु के आशीर्वाद से आज उसी अलौकिकता को आधुनिक भारत के आत्मविश्वास के साथ साकार किया जा रहा है।

दीपोत्सव से हमारा सनातन संबंध केवल परंपराओं से नहीं, अपितु उच्च जीवन-मूल्यों से है। 14 वर्षों तक पूज्य भरत जी ने राजसुख त्याग कर प्रभु श्रीराम की चरण-पादुकाओं को सिंहासन पर प्रतिष्ठित कर अयोध्या के राज्य का संचालन किया। यह पावन प्रसंग हमें सिखाता है कि शासन और सत्ता का वास्तविक अर्थ अधिकार नहीं, अपितु लोक-कल्याणकारी दायित्व है।

अयोध्या का यह दीपोत्सव त्याग, मर्यादा, सेवा और समर्पण की इसी उदात्त भावना को आज विश्वपटल पर पुनर्स्थापित कर रहा है। इस दिव्यता के साथ इतिहास के उस काले दौर को भी याद रखना होगा, जिसने दशकों तक हमारी आस्था को लहूलुहान किया।

अयोध्या को आजादी के बाद तुष्टीकरण, वोटबैंक की संकीर्ण भूख और छद्म पंथनिरपेक्षता की राजनीति ने उपेक्षा के अंधकार में धकेल दिया। वह दारुण समय था, जब प्रभु श्रीराम के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न खड़े किए गए और अपनी ही सनातन संस्कृति की चर्चा करने में संकोच किया जाता था। जिन तीर्थों को हम राष्ट्रीय आत्मा मानते थे, उन्हें जब बदहाल छोड़ दिया गया, तो देश के समग्र उत्थान का मनोबल टूटा।

आज की युवा पीढ़ी डिजिटल युग में जी रही है, इसलिए परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ना हमारा दायित्व है। मां सरयू के तट पर सजी भव्य दीपमाला, राम की पैड़ी पर लाखों दीपों की जगमगाहट, जल-तरंगों पर बने फ्लोटिंग मंच पर सजीव मंचीय प्रस्तुतियां, आगमेंटेड रियलिटी के माध्यम से स्क्रीन पर थ्री-डी रूप में साकार होते रामायण के प्रसंग, लेजर शो और ड्रोन के माध्यम से रात्रि के नभमंडल में रामायण का चित्रण महोत्सव को अलौकिक भव्यता प्रदान करने वाले होंगे।

12 देशों के सांस्कृतिक दलों की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रभु श्रीराम का चरित्र संपूर्ण मानवता के लिए सत्य, शांति और मर्यादा का मार्गदर्शक है। इस विराट उत्सव का सबसे पवित्र पक्ष है, आस्था और आर्थिकी का संगम। जहां प्रकाश है, वहां सुरक्षा का वास है। जहां सुरक्षा है, वहां निवेश के अवसर हैं, जहां निवेश है, वहां विकास है और जहां विकास है, वहीं रोजगार तथा सुख-समृद्धि हैं।

दीपोत्सव केवल अयोध्या को दीपों से सजाने का आयोजन नहीं है। यह उन परंपराओं को फिर से अपने जीवन का हिस्सा बनाने का अवसर है, जिन्हें समय के साथ उपेक्षित कर दिया गया था। वर्षों तक हमारी लोककला, लोकसंस्कृति और पारंपरिक शिल्प को वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे अधिकारी थे। 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने और 2017 में उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार बनने के बाद इस दिशा में ठोस प्रयास हुए।

दीपोत्सव की भव्यता में हमारे स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों, दस्तकारों और कुम्हारों का महत्वपूर्ण योगदान है। उनकी कला और परिश्रम हमारी परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं। ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना ने प्रदेश के स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को नई पहचान दी है। इसी वर्ष प्रारंभ ‘एक जनपद, एक व्यंजन’ योजना भी हमारे जनपदों की पाक परंपराओं को आगे बढ़ाएगी।

दीपोत्सव के माध्यम से हमारे माटी-कलाकार, कुम्हार भाई, पुष्प विक्रेता, नाविक, छोटे पटरी दुकानदार, हस्तशिल्पी और होटल एवं होमस्टे व्यवसायियों के लिए व्यापक रोजगार और आय के नए साधन सृजित हुए हैं। धार्मिक पर्यटन ने अयोध्या के स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका के असीम द्वार खोल दिए हैं। आस्था जब अर्थव्यवस्था का संबल बनती है, तो अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के घर में खुशहाली का दीप स्वतः जल उठता है।

अंत्योदय की इसी भावना को विस्तार देते हुए इस पावन अवसर पर प्रदेश के 1.89 करोड़ उज्ज्वला लाभार्थी परिवारों को नि:शुल्क रसोई गैस सिलिंडर रीफिल भेंट किया गया। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिकतम अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन, चौड़े और सुसज्जित धर्म पथ, भक्ति पथ, राम पथ और संवरते घाट इसके प्रमाण हैं कि जब नीति में निष्ठा और नीयत में सच्चाई होती है, तो विकास और विरासत एक साथ आगे बढ़ते हैं।

इस दीपावली पर आग्रह है कि सभी अपने यहां के स्थानीय कुम्हारों के दीपक और शिल्पकारों के उत्पाद अपनाएं। अपने प्रियजनों को उपहार देते समय भी इनको प्राथमिकता दें। ‘वोकल फार लोकल’ का संकल्प हमारी अपनी मिट्टी, अपनी कला और अपने लोगों को समृद्ध बनाने का संकल्प है। आप सभी धर्मनगरी अयोध्या पधारें और प्रभु श्रीराम की पावन जन्मभूमि पर दीपोत्सव की इस अलौकिक छटा के साक्षी बनें।

हर घर खुशहाली हो, हर मन में सद्भाव हो और संपूर्ण राष्ट्र का प्रगति पथ निरंतर प्रशस्त हो, इसी प्रार्थना के साथ अयोध्या दीपोत्सव एवं प्रकाशपर्व दीपावली की अनंत मंगलकामनाएं! सियावर रामचंद्र की जय!

(लेखक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं)