कांग्रेस ने सहयोगी दलों के साथ दिल्ली के रामलीला मैदान की अपनी वोट बचाओ-देश बचाओ रैली में दावे और साथ ही अपेक्षा से कहीं कम भीड़ जुटने के कारण जिस तरह कई राज्यों के दो सौ से अधिक पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया, उससे उसकी हताशा और खीझ का ही पता चलता है। अधिकतर निलंबित पदाधिकारी युवक कांग्रेस के हैं। इनमें प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव स्तर के नेता हैं। इन पर गाज इसलिए गिरी, क्योंकि वे दिल्ली आए ही नहीं।

कांग्रेस के युवा नेताओं की रामलीला मैदान में अनुपस्थिति केवल यही बयान नहीं कर रही कि उन्हें पार्टी नेतृत्व और विशेषकर राहुल गांधी के इस नैरेटिव में कोई दम नहीं दिखा कि मतदाता सूचियों के शुद्धीकरण की प्रक्रिया यानी एसआइआर के जरिये वोट चोरी की जा रही है। उनकी दिल्ली में गैरहाजिरी यह भी बता रही है कि कांग्रेस का युवा संगठन शिथिल और उत्साहहीन है।

संभव है कि इसका कारण राहुल गांधी की ओर से एसआइआर को वोट चोरी करार देकर उसे अनावश्यक तूल देना हो। यह पहली बार नहीं, जब राहुल ने ऐसा मुद्दा उठाया हो, जो आम जनता का ध्यान नहीं खींच सका। इसके पहले उन्होंने राफेल सौदे को लेकर चौकीदार चोर है का नारा गढ़ा, लेकिन नाकाम रहे। ईवीएम के खिलाफ मोर्चा खोलने से भी उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ। उनके इस आरोप ने भी जनता के बीच कोई असर नहीं दिखाया कि मोदी सरकार केवल चंद उद्यमियों के लिए ही काम कर रही है।

राहुल गांधी और उनके साथी यह समझने को तैयार नहीं कि किसी तत्वहीन मुद्दे को तूल देने और अशालीन भाषा इस्तेमाल करने से वह प्रभावी मुद्दा नहीं बन जाता। जब कोई मुद्दा जनता का ध्यान आकृष्ट नहीं कर पाता तो उसे लेकर पार्टी के छोटे-बड़े नेताओं को लोगों को अपने साथ जोड़ना कठिन हो जाता है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के साथ यही हो रहा है।

समस्या यह है कि अपनी गलतियों से सबक सीखने के स्थान पर कांग्रेस अतिवादी किस्म के वामपंथियों और ऐसे लोगों को साथ लेना पसंद कर रही है, जो अराजकता की राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं। अभी हाल तक काकरोच जनता पार्टी से दूरी बनाने वाली कांग्रेस ने दिल्ली की अपनी रैली के लिए उसे भी अपने साथ लेना जरूरी समझा। यह वह समूह है, जिस पर विदेशी संगठनों के प्रभाव में काम करने के आरोप लगे हैं।

शायद इसी कारण प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष भारत विरोधी ताकतों के साथ मिलकर देश तोड़ने की साजिश रच रहा है। गत दिवस केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी कहा कि सीजेपी नेताओं को बाहरी देशों से वित्तीय मदद मिल रही है। यदि ऐसा कुछ है तो केवल आरोपों से बात नहीं बनेगी। सरकार को अपने आरोपों के पक्ष में तथ्य सामने रखने होंगे।