Railway के स्वच्छता अभियान में आनंद विहार Pass, नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और निजामुद्दीन Fail
दिल्ली के रेलवे स्टेशनों पर गंदगी और अव्यवस्था का आलम है। नई दिल्ली पुरानी दिल्ली और निजामुद्दीन स्टेशनों पर सफाई व्यवस्था चिंताजनक है। यात्रियों को गंदगी के बीच बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। रेलवे का कहना है कि स्वच्छता मानकों का पालन किया जा रहा है और यात्रियों से सहयोग की अपेक्षा है।

लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली का नाम सुनते ही मन में एक स्वच्छ, विकसित और व्यवस्थित शहर की छवि उभरती है। हालांकि, जब वास्तविकता से सामना होता है, तो यह छवि पूरी तरह से धूमिल हो जाती है। नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली के साथ निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों का हाल कुछ ऐसा ही है। यहां जागरण की पड़ताल में सफाई व्यवस्था चिंताजनक नजर आई। वहीं, आनंद विहार स्टेशन के अंदर साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त पाई गई।
गंदगी के बीच प्लेटफाॅर्म पर बैठने को मजबूर
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की दीवारें गुटखे की पीकों से रंगी हुई हैं। प्लेटफाॅर्मों पर खाने के अवशेष और प्लास्टिक कचरा बिखरा पड़ा है, लेकिन सफाई कर्मचारी कहीं नजर नहीं आते। यात्रियों को इस गंदगी के बीच प्लेटफाॅर्म पर बैठने को मजबूर होना पड़ता है। नियमित सफाई की कमी स्टेशन की छवि को और खराब करती है।
पुरानी दिल्ली स्टेशन : उपेक्षा का शिकार
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन की स्थिति और भी बदतर है। प्लेटफाॅर्म 4 और 5 के नीचे रेल की पटरियों पर चूहों की भरमार है। कई जगहों पर कचरे के ढेर नजर आते हैं। प्लेटफाॅर्मों पर गंदगी का अंबार उपेक्षा को उजागर करता है, जिससे यात्रियों को असुविधा होती है।
हजरत निजामुद्दीन : कचरा और लापरवाही
हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के प्लेटफाॅर्म 1 की पटरियों के छोर पर नमकीन, बिस्किट के रैपर, खाली बोतलें और सड़े-गले फल बिखरे मिले। किनारे की नालियों से सिल्ट निकालकर पटरियों पर ही रखा गया है। हालांकि, प्लेटफाॅर्म पर डस्टबिन लगे हैं लेकिन उनका समुचित उपयोग नहीं हो रहा, जिससे गंदगी बढ़ रही है।
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यात्रियों ने कहा...
निराशा और शिकायतेंयात्री अपनी नाराजगी खुलकर व्यक्त कर रहे हैं। रूबी ने कहा, “सरकार स्वच्छता पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, फिर भी हालात बदतर हैं। पेयजल की स्थिति ऐसी है कि इसे पीने से पहले सोचना पड़ता है, क्योंकि उसमें मच्छर पनपते दिखते हैं।”
मुरारी ने तुलना करते हुए कहा, “दिल्ली मेट्रो स्टेशनों की सफाई का कोई मुकाबला नहीं, लेकिन रेलवे स्टेशनों पर वैसा स्तर क्यों नहीं? गुटखा खाकर थूकना यहाँ आम है और महीनों तक सफाई नहीं होती।”
अभिषेक ने बताया, “मैं अपनी पत्नी को लेने पुरानी दिल्ली स्टेशन आया था। ट्रेन 11 घंटे लेट है। स्टेशन के प्रवेश द्वार पर बदबू और गंदगी का आलम है। लोगों ने खुले में शौच कर रखा है। प्रशासन और जनता दोनों ही स्वच्छता के प्रति गंभीर नहीं हैं।”
सत्यम ने सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा, “सुरक्षा जांच भी ढीली है। कई य atuरी बिना चेकिंग के प्लेटफाॅर्म तक पहुँच जाते हैं, जो न केवल सुरक्षा में सेंध लगाता है, बल्कि गंदगी भी फैलाता है।”
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रेलवे का दावा : स्वच्छता मानकों का पालन
रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली स्टेशन देश के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से हैं, जहाँ प्रतिदिन भारी संख्या में यात्री आते हैं। नई दिल्ली स्टेशन पर दिसंबर 2024 से और पुरानी दिल्ली स्टेशन पर जून व जुलाई 2025 से नया स्वच्छता अनुबंध लागू है। इसके तहत 24 घंटे मशीन से सफाई, कचरा प्रबंधन और कीट/कृंतक नियंत्रण की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने दावा किया कि स्वच्छता मानकों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। हालांकि, कुछ यात्रियों द्वारा थूकने और कचरा फैलाने की प्रवृत्ति अब भी चुनौती बनी हुई है।
इसके लिए स्टेशन पर पर्याप्त डस्टबिन लगाए गए हैं, नियमित उद्घोषणाएँ की जा रही हैं और जुर्माना भी लगाया जा रहा है। रेलवे ने यात्रियों से स्वच्छ और सुरक्षित स्टेशन के लिए सहयोग की अपील की है।
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