दिल्ली को दक्षिण-पूर्व एशिया का ड्रग ट्रांजिट हब बनाने की कोशिश में अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडीकेट; 27 तस्कर दबोचे
दिल्ली कस्टम्स ने आईजीआई एयरपोर्ट पर 14 महीनों में 122 किलोग्राम से अधिक नशीला पदार्थ जब्त किया है, जिसकी कीमत 154 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इस दौरान ...और पढ़ें
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
मुकेश ठाकुर, नई दिल्ली। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे पर तैनात कस्टम विभाग ने ड्रग्स तस्करी के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज कर दिया है। विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, गत 14 महीनों दिसंबर 2024 से लेकर 2 जनवरी 2026 तक दिल्ली कस्टम्स ने कुल 122 किलोग्राम से अधिक नशीला पदार्थ जब्त किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 154 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है।
27 तस्करों को भेजा गया जेल
इस दौरान दक्षिण-पूर्व एशिया, विशेषकर बैंकाॅक से सक्रिय अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए कुल 27 तस्करों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इसी अभियान के तहत ताजा कार्रवाई में बैंकाॅक से आए दो भारतीय आरोपितों को 31 दिसंबर को टर्मिनल-3 पर दबोचा गया है।
विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज
आईजीआई एयरपोर्ट कस्टम के एडिशनल कमिश्नर ने बताया कि प्रोफाइलिंग के आधार पर पकड़े गए इन आरोपितों के ट्रॉली बैग की तलाशी लेने पर 20.95 करोड़ रुपये मूल्य की 2095.5 ग्राम कोकीन बरामद हुई।
यह आरोपित बैंकाॅक से अलग-अलग उड़ानों के जरिए दिल्ली पहुंचे थे और इन्होंने नशीले पदार्थ को काले रंग के पॉलीथीन पैकेटों में छिपा रखा था। आरोपितों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय साजिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया
कस्टम अधिकारियों के अनुसार, बैंकाॅक अब मादक पदार्थों की तस्करी के एक नए केंद्र के रूप में उभर रहा है, जहां से हाइड्रोपोनिक गांजा और कोकीन जैसी महंगी ड्रग्स भारत भेजने की कोशिश की जा रही है।
दिल्ली कस्टम्स की सतर्कता के कारण पिछले एक साल में पकड़े गए कुल ड्रग तस्करी के मामलों में 90 प्रतिशत से अधिक मामले बैंकॉक मार्ग से हुए थे। विभाग की इस सख्ती ने दिल्ली को दक्षिण-पूर्व एशिया का ड्रग हब बनाने की अंतरराष्ट्रीय साजिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि हवाई अड्डे पर सुरक्षा और निगरानी तंत्र को इतना अभेद्य बना दिया गया है कि तस्करों का बच निकलना नामुमकिन है।
कब-कब कितनी की गई बरामदगी...
| महीना | बरामदगी (वजन) | अनुमानित कीमत | यात्री व मार्ग |
जनवरी 2026 | 2.09 किग्रा कोकीन | 21 करोड़ | 2 आरोपित (बैंकाॅक) |
| दिसंबर 2025 | 48.01 किग्रा गांजा | 48 करोड़ | 6 यात्री (बैंकाॅक) |
| दिसंबर 2025 | 13.12 किग्रा गांजा | 10.5 करोड़ | 1 यात्री (बैंकाॅक) |
| अक्टूबर 2025 | 11.92 किग्रा गांजा | 11.92 करोड़ | 1 यात्री (बैंकाॅक) |
| अगस्त 2025 | 24.81 किग्रा गांजा | 24.8 करोड़ | 1 यात्री (बैंकाॅक) |
| दिसंबर 2024 | 156 कोकीन कैप्सूल | 27 करोड़ | 2 यात्री |
तस्करों का बदला पैटर्न, अबकर रहे हाइड्रोपोनिक गांजा की तस्करी
तस्कर अब साधारण गांजे के बजाय हाइड्रोपोनिक गांजा ला रहे हैं। क्योंकि हाइड्रोपोनिक गांजा बिना मिट्टी के, केवल पोषक तत्वों वाले पानी और नियंत्रित वातावरण में उगाया जाने वाला उन्नत नशा है। साधारण गांजे के मुकाबले इसमें टीएचसी की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिससे यह ज्यादा नशीला और घातक होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 3 से 5 हजार रुपये प्रति ग्राम तक होती है, जिस कारण तस्कर इसे ऊंचे मुनाफे के लिए भारत लाते हैं। यहां लाकर मात्र बढ़ा कई गुणा कीमत पर बेचते हैं।
कौन होते हैं ड्रग लेकर कुरियर बनकर भारत पहुंचने वाले युवा
ड्रग तस्करी के जाल में फंसने वाले ये युवा मुख्य रूप से 20 से 35 वर्ष के बेरोजगार छात्र, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और आर्थिक रूप से कमजोर लोग होते हैं। तस्कर इन्हें कूरियर बनाने के लिए मुफ्त विदेश यात्रा, फ्री वेकेशन, लग्जरी लाइफस्टाइल और एक ट्रिप के बदले 50 हजार 2 लाख रुपये तक का लालच देते हैं।
थाईलैंड में गांजे की वैधता का फायदा उठाकर तस्कर इन युवाओं को गुमराह करते हैं कि इसे भारत ले जाना कानूनी है। कई बार कर्ज में डूबे युवाओं को मजबूरी में या अनजाने में फॉल्स बॉटम बैग देकर इस्तेमाल किया जाता है।
हाइड्रोपोनिक गांजे जैसे महंगे नशों को वैक्यूम सील कर तस्करी कराई जाती है, जिससे युवा अनजाने में फंसकर अपना भविष्य बर्बाद कर लेते हैं। एंटी नारकोटिक्स ब्यूरो इस बात की तफ्तीश कर रहा है कि भारत में इन खेपों को रिसीव करने वाले मास्टरमाइंड कौन हैं।

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