क्या खतरे में वेनेजुएला में इन 9 भारतीय कंपनियों का कारोबार, अमेरिका के हमले का क्या होगा असर, कितना हो सकता है नुकसान?
लैटिन अमेरिकी देश, वेनेजुएला में रिलायंस इंडस्ट्रीज और ओएनजीसी समेत 9 भारतीय कंपनियों का कारोबार है। इनमें ऑयल कंपनियों के ...और पढ़ें
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नई दिल्ली। लैटिन अमेरिकी देश, वेनेजुएला (Venezuela Crisis) पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई से पूरी दुनिया में हड़कंप मच हुआ है। क्योंकि, इसका गहरा आर्थिक असर देखने को मिल सकता है, और 9 भारतीय लिस्टेड कंपनियों पर भी इस संकट का संभावित असर देखने को मिल सकता है। क्योंकि, इन कंपनियों का वेनेजुएला में बड़ा बिजनेस और कारोबारी संबंध हैं, इसलिए भारतीय शेयर बाजार के निवेशक उन कंपनियों पर करीब से नज़र रख रहे हैं जिनका वेनेजुएला में बिजनेस है।
वेनेजुएला पर अमेरिका के हमले से जियोपॉलिटिकल जोखिम बढ़ गए हैं, लेकिन अगर नई सरकार के तहत वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका के पुराने प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो नए मौके भी खुल सकते हैं। चूंकि, भारत के वेनेजुएला के साथ मुख्य संबंध एनर्जी सेक्टर में हैं, जहां कई सरकारी और प्राइवेट कंपनियों ने पहले भी भारी कच्चा तेल इम्पोर्ट किया है या तेल प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी रखी है। वेनेजुएला संकट से जहां भारतीय ऑयल कंपनियों को फायदा मिल सकता है तो कुछ अन्य कंपनियों का बिजनेस प्रभावित हो सकता है।
वेनेजुएला में इन 9 भारतीय कंपनियों का बिजनेस
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफ़रीज़ समेत अन्य एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर तेल की सप्लाई फिर से शुरू होती है और प्रोडक्शन बढ़ता है, तो रिलायंस इंडस्ट्रीज और ONGC जैसी कंपनियाँ संभावित लाभार्थी हो सकती हैं।
ONGC: ओएनजीसी, अपनी ओवरसीज़ शाखा के ज़रिए दो वेनेज़ुएला तेल प्रोजेक्ट्स में सीधे इक्विटी हिस्सेदारी रखती है। प्रतिबंधों में ढील से ज़्यादा प्रोडक्शन, बेहतर कैश फ्लो और पिछले बकाया की रिकवरी हो सकती है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज: वेनेज़ुएला के भारी कच्चे तेल के सबसे बड़े पुराने इंपोर्टर्स में से एक, जो इसकी रिफाइनरियों के लिए उपयुक्त है। हाल ही में दोबारा सप्लाई शुरू होने से मार्जिन और वैल्यूएशन बढ़ने की संभावना है।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन: आईओसी, कैराबोबो हेवी ऑयल प्रोजेक्ट में इक्विटी वाले एक कंसोर्टियम का हिस्सा है। ऐसे में प्रोडक्शन रुकने से इसका बिजनेस प्रभावित हो सकता है, लेकिन ऑपरेशन स्थिर होने पर फायदा होगा।
ऑयल इंडिया: ONGC और IOC के साथ एक जॉइंट वेंचर ऑयल प्रोजेक्ट में माइनॉरिटी स्टेकहोल्डर है, और इसका असर अपस्ट्रीम रुकावटों या रिकवरी से जुड़ा है।
मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स: पहले वेनेजुएला से कच्चा तेल सोर्स किया है। ग्लोबल ऑयल मार्केट फ्लो में बदलाव रिफाइनिंग इकोनॉमिक्स को प्रभावित कर सकते हैं।
इंजीनियर्स इंडिया: यह प्रोजेक्ट और बिज़नेस डेवलपमेंट के लिए कराकस में एक ओवरसीज़ ऑफिस चलाती है। वेनेजुएला में ज़मीनी स्तर पर बिगड़ते हालात से इसे स्थानीय अस्थिरता का सामना करना पड़ता है।
सन फार्मा: वेनेजुएला में एक रजिस्टर्ड सब्सिडियरी चलाती है। राजनीतिक उथल-पुथल के कारण कंपनी को फार्मास्युटिकल ऑपरेशन्स में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स: एक स्थानीय सहायक कंपनी के ज़रिए ऑपरेशन चलाती है। वेनेजुएला में मार्केट एक्सेस और सप्लाई चेन बाधित हो सकती हैं।
सिप्ला: ऐतिहासिक रूप से देश को ज़रूरी दवाएं निर्यात की हैं। आर्थिक या लॉजिस्टिक्स समस्याओं से व्यापार पर असर पड़ सकता है
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चूंकि, वेनेजुएला में लंबे समय के राष्ट्रपति मादुरो का शासन रहा था और अब अमेरिकी के हमले के बाद इस देश की नीति में बदलाव अमेरिकी पर निर्भर करेंगे। इससे ग्लोबल ऑयल मार्केट में सतर्ता बनी हुई है। अगर स्थिरता लौटती है तो वेनेजुएला से सप्लाई बढ़ने की संभावना से कच्चे तेल की कीमतें गिर सकती हैं।
