9 दिन में फ्लोर टेस्ट क्लियर: सम्राट चौधरी को मिला विधानसभा का भरोसा; ध्वनिमत से पास हुआ विश्वासमत
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार विधानसभा में ध्वनि मत से विश्वास मत हासिल कर लिया है। संख्या बल के आधार ...और पढ़ें

विश्वासमत प्रस्ताव के दौरान सीएम सम्राट चौधरी। वीडियो ग्रैब
HighLights
सम्राट चौधरी ने बिहार विधानसभा में विश्वास मत हासिल किया।
सरकार ने ध्वनि मत के आधार पर सदन का विश्वास जीता।
संख्या बल के कारण मतदान की संभावना पहले ही कम थी।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार की सियासत में बड़ा दिन रहा, जब Samrat Choudhary के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर लिया।
ध्वनि मत के आधार पर सरकार ने आसानी से सदन का भरोसा जीत लिया, क्योंकि संख्याबल पहले से ही उसके पक्ष में मजबूत था।
विधानसभा में एनडीए के पास करीब 201 विधायकों का समर्थन है, जबकि बहुमत के लिए 122 का आंकड़ा जरूरी है। यही वजह रही कि मतदान की नौबत नहीं आई और ध्वनि मत से ही प्रस्ताव पारित हो गया।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का तंज
दिलचस्प यह रहा कि नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने तंज के साथ ही सही, लेकिन सरकार को समर्थन देने का एलान किया।
15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के महज नौ दिन बाद सम्राट चौधरी ने सदन में बहुमत साबित कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली। विश्वासमत के बाद स्पीकर Prem Kumar समेत कई सदस्यों ने उन्हें बधाई दी।
बहस के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने Lalu Prasad Yadav के शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उस दौर में उनके साथ अत्याचार नहीं हुआ होता, तो शायद वे आज इस मुकाम तक नहीं पहुंचते।
3 सी से कोई समझौता नहीं
साथ ही उन्होंने Nitish Kumar के नेतृत्व और सिद्धांतों की सराहना करते हुए कहा कि “विकसित बिहार” का लक्ष्य उनकी सरकार की प्राथमिकता रहेगा।
तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए सम्राट चौधरी ने व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि “जो अपने घर में बहन का सम्मान नहीं कर सकता, वह दूसरों का क्या करेगा।” इस बयान से सदन में सियासी तापमान और बढ़ गया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार “3C”—क्राइम, कम्यूनलिज्म और करप्शन—से किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेगी।

उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार महिलाओं की सुरक्षा, किसानों के हित और सुशासन को प्राथमिकता देती रही है और आगे भी उसी दिशा में काम जारी रहेगा।
विश्वासमत हासिल करने के साथ ही सम्राट चौधरी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच भी उनकी सरकार स्थिर है और विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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