समर्थन भी, सियासी वार भी: तेजस्वी यादव ने सदन में सम्राट सरकार को घेरा
बिहार विधानसभा में विश्वास मत के दौरान तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी सरकार को समर्थन देने के साथ तीखे हमले ...और पढ़ें
HighLights
सम्राट चौधरी सरकार को समर्थन के साथ तीखे हमले।
बिहार के खाली खजाने, 4 लाख करोड़ कर्ज पर सवाल।
'इलेक्टेड नहीं, सलेक्टेड' मुख्यमंत्री कहकर कसा तंज।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार विधानसभा में विश्वास मत के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक तरफ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार को समर्थन देने का एलान किया, तो दूसरी ओर तीखे हमलों से सियासी तापमान बढ़ा दिया।
उन्होंने साफ कहा कि सरकार नई नीतियों और योजनाओं में विपक्ष की राय भी शामिल करे, ताकि फैसले व्यापक सहमति से लिए जा सकें।
सदन में अपने संबोधन के दौरान तेजस्वी ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि बिहार का खजाना खाली है और विकास के लिए संसाधन जुटाना बड़ी चुनौती है।
नीतीश को हटाने का संकल्प पूरा, संभालकर रखें पगड़ी
उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि पक्ष-विपक्ष मिलकर प्रधानमंत्री के पास जाएं और बिहार के लिए विशेष पैकेज की मांग करें।
तेजस्वी यहीं नहीं रुके। उन्होंने सम्राट चौधरी को इलेक्टेड नहीं, सलेक्टेड मुख्यमंत्री बताते हुए तंज कसा और याद दिलाया कि नीतीश कुमार को हटाने का उनका संकल्प पूरा हो चुका है।
साथ ही चुटकी लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अपनी पगड़ी संभाल कर रखें, क्योंकि विजय कुमार सिन्हा की नजर भी कुर्सी पर है।
परिवारवाद के मुद्दे पर भी तेजस्वी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अब केवल उन्हें ही इस आरोप का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि सम्राट चौधरी के परिवार के सदस्य भी राजनीति में सक्रिय हैं।
लालू जी सीएम तो सरप्लस में था खजाना
आर्थिक मोर्चे पर उन्होंने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा। तेजस्वी के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में बिहार सरकार ने करीब 40,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया और इस साल भी 12,000 करोड़ रुपये का लोन लिया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि राज्य पर कुल कर्ज लगभग 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिससे प्रति व्यक्ति आय और वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।
जब लालू जी बने तब सरप्लस में था। बिहार पर चार लाख करोड़ का कर्ज है। खजाना खाली है तो काम कैसे होगा। यह जानना चाहते हैं।
सम्राट के सीएम बनने से भाजपा-आरएसएस के कई नेता असंतुष्ट
उन्होंने कहा कि 2025 से 30 फिर से नीतीश का नारा लगाया जा रहा था, लेकिन भाजपा ने नीतीश को फिनिश कर दिया।
पांच साल में पांचवीं सरकार का गठन हुआ, ऐसे में विकास कैसे होगा? बिहार इस मामले में अजूबा राज्य है। भले भाजपा का पहला सीएम हो लेकिन भाजपा, आरएसएस के लोग संतुष्ट नहीं हैं।
जो ऑरिजिनल भाजपाई हैं, जिन्होंने त्याग दिया, वे सीएम नहीं बने। वे ठगे महसूस कर रहे हैं। टॉप थ्री में जो हैं उनमें सम्राट जी लालू जी की पाठशाला से, विजय चौधरी कांग्रेस से और बिजेंद्र प्रसाद यादव जनता दल से निकले।
