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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 04, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सुबह बालिका, दिन में युवा और शाम को वृद्धा के रूप में दर्शन देती हैं मां धारी देवी

By sunil negiEdited By:
Published: Tue, 04 Oct 2016 09:28 AM (IST)Updated: Thu, 03 Nov 2016 07:00 AM (IST)

सिद्धपीठ मां धारी देवी का मंदिर पौड़ी जनपद के कलियासौड़ में अलकनंदा नदी के बीच में बना हुआ है। यहां पर देवी तीन रूपों में मानी जाती है।

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श्रीनगर गढ़वाल, [जेएनएन]: सिद्धपीठ मां धारी देवी का मंदिर पौड़ी जनपद के कलियासौड़ में अलकनंदा नदी के बीच में बना हुआ है। भक्तजन नदी पर बने एक छोटे से पुल को पार कर मंदिर तक पहुंचते हैं। यहां पर देवी तीन रूपों में मानी जाती है। सुबह बालिका, दिन में युवा और शाम को वृद्धा के रूप में दर्शन देती है।

इतिहास
सिद्धपीठ मां धारी देवी आदिकाल से ही पूजनीय है। कहा जाता है कि जगदगुरु शंकराचार्य ने भी यहां पर पूजा की है। धारी गांव के सामने मंदिर होने से इस सिद्धपीठ को आदिकाल से धारी देवी मंदिर के रूप में जाना जाता है। मंदिर अलकनंदा नदी के बाएं पाश्र्व में है। यह सिद्धपीठ कलियासौड़ की कालिंका के नाम से भी प्रसिद्ध है। 1986 में बलि प्रथा बंद होने के बाद श्रद्धालुओं द्वारा सात्विक पूजा अर्चना की जाने लगी है।



महातम्य
कालिका सहस्त्रनाम के अनुसार सिद्धपीठ धारी देवी मंदिर में मां भगवती काली देवी के रूप में कल्याण करने वाले स्वरूप में है। नवरात्रों पर विशेष पूजा अर्चना होती है। जिसमें देश प्रदेश से ही नहीं वरन विदेश से भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां धारी देवी से अपनी मनोकामना की इच्छा करते हैं और मनोकामना पूर्ण होने पर पुन: आकर मंदिर में घंटियां, छत्र और नारियल भी चढ़ाते हैं।

नवरात्रों पर होती विशेष पूजा-अर्चना

सिद्धपीठ मां धारी देवी मंदिर के पुजारी पंडित लक्ष्मी प्रसाद पांडे बताते हैं कि नवरात्रों पर सिद्धपीठ मां धारी देवी मंदिर में विशेष पूजा अर्चना होती है। प्रथम नवरात्र पर हरियाली बोई जाती है। जिसे नवमी को भक्तों को प्रसाद के रूप में प्रदान किया जाता है। मां धारी भक्त की मनोकामना पूर्ण करती है। इसीलिए आदिकाल से ही इसका महातम्य भी है।

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ऐसे पहुंचें मंदिर
ऋषिकेश से लगभग 118 किमी और श्रीनगर से लगभग 14 किमी दूर बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर कलियासौड़ के समीप अलकनंदा नदी पर सिद्धपीठ मां धारी देवी का मंदिर है। कलियासौड़ से लगभग आधा किमी की पैदल दूरी तय कर मंदिर तक पहुंचा जाता है।

मंदिर खुलने का समय
श्रद्धालुओं के लिए सिद्धपीठ धारी देवी मंदिर वर्षभर खुला रहता है। प्रात: लगभग साढ़े चार बजे से पुजारियों द्वारा मां भगवती की पूजा आराधना शुरू हो जाती है।

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