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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 26, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सीआइआइ रैंकिंग में आइआइटी रुड़की ने हासिल किया तीसरा स्थान

By BhanuEdited By:
Published: Wed, 26 Apr 2017 02:39 PM (IST)Updated: Thu, 27 Apr 2017 05:00 AM (IST)

कानफिडिरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआइआइ) ने देश के आइआइएम, आइआइटी, एनआइटी और अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों की परफॉरमेंस रिपोर्ट जारी की है। इसमें आइआइटी रुड़की को तीसरा स्थान मिला।

सीआइआइ रैंकिंग में आइआइटी रुड़की ने हासिल किया तीसरा स्थान
सीआइआइ रैंकिंग में आइआइटी रुड़की ने हासिल किया तीसरा स्थान

रुड़की, [जेएनएन]: कानफिडिरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआइआइ) ने देश के आइआइएम, आइआइटी, एनआइटी और अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों की परफॉरमेंस रिपोर्ट जारी की है। भारत में प्रकाशित शोध पत्रों की संख्या के आधार पर आइआइटी रुड़की को देश में तीसरा स्थान मिला है। 

इस रैंकिंग में आइआइटी खड़गपुर पहले और आइआइटी दिल्ली दूसरे स्थान पर हैं। इसके अलावा इस रिपोर्ट में सभी आइआइटी से टॉप 100 प्रोफेसरों के नाम भी प्रकाशित किए हैं। इन 100 प्रोफेसरों में से 19 प्रोफेसर आइआइटी रुड़की के हैं। वहीं आइआइटी रुड़की के प्रो. प्रवीण कुमार और प्रो. प्रदीप कुमार को संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर रखा है।

इसके अलावा टॉप 100 प्रोफेसरों की सूची में डॉ. आरडी गर्ग, जीजे चक्रपानी, मधु जैन, भूपेंद्र ङ्क्षसह, पीके गर्ग, एसपी सिंह, सतीश चंद्र, के पाल, पी कुमार, अरुण मंडल, के चंद्र, अपूर्व शर्मा, एसके त्रिपाठी, संतोष रांगनेकर, संदीप सिंह और एसके कौशिक शामिल हैं। 

आइआइटी रुड़की के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. प्रवीण कुमार के अनुसार रुड़की विश्वविद्यालय को आइआइटी रुड़की बनाते समय तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा था कि जहां सभी आइआइटी के छात्र भारत में शिक्षा लेकर विदेश में बस जाते हैं। वहीं रुड़की विवि के छात्र यहां शिक्षा लेकर भारत में ही सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट से एक बार फिर यह सिद्ध हुआ है कि भारत में सेवा देने में आइआइटी रुड़की औरों से आगे है।

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