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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 14, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

देहरादून की पहचान घंटाघर की नींव हुई कमजोर, सौंदर्यीकरण का कार्य रोका

By BhanuEdited By:
Published: Fri, 14 Oct 2016 01:35 PM (IST)Updated: Sat, 15 Oct 2016 04:30 AM (IST)

शहर के 'दिल' घंटाघर की नींव बेहद कमजोर हो चुकी है। ऐसे में 87 लाख की लागत से होने वाला इसके सौंदर्यीकरण का कार्य रोक दिया गया है।

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देहरादून, [जेएनएन]: शहर के 'दिल' घंटाघर की नींव बेहद कमजोर हो चुकी है। ऐसे में 87 लाख की लागत से होने वाला इसके सौंदर्यीकरण का कार्य रोक दिया गया है। नींव कमजोर होने का कारण घंटाघर के परिसर में खड़े विशाल पेड़ को बताया जा रहा। महापौर विनोद चमोली के अनुसार जब तक नींव को मजबूत करने का काम नहीं कराया जाएगा, तब तक सौंदर्यीकरण कार्य संभव नहीं।
घंटाघर के भूमिगत कार्य समेत अन्य सुधारीकरण कार्य के लिए निगम ने लोनिवि को जिम्मा सौंपा है, लेकिन विभाग का बजट प्रस्ताव शासन से मंजूर नहीं हुआ। इस मामले में महापौर ने निगम फंड से सुधारीकरण के लिए 50 लाख की धनराशि मंजूर करने का आदेश दिया।

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घंटाघर की जर्जर हालत जल्द सुधरने की उम्मीद थी। इस पर को विराम लग गया। निगम क्षेत्र में अमृत योजना से होने वाले कार्यों पर महापौर विनोद चमोली ने बैठक बुलाई थी, मगर इसमें घंटाघर के सौंदर्यीकरण का मामला उठ गया।

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उम्मीद थी कि करीब नौ साल से बंद इसकी घड़ियों की सुइयां भी चलने लगेंगी। साथ ही परिसर में फव्वारे व चमचमाती हुई लाइट भी दिखेंगी। ओएनजीसी ने लगभग 87 लाख रुपये खर्च उठाने को स्वीकृति भी दे दी थी। टेंडर भी हो चुके थे, लेकिन जब महापौर ने कार्य के बारे में पूछा तो लोनिवि अधिकारियों ने बताया कि घंटाघर की नींव बेहद कमजोर है, लिहाजा सौंदर्यीकरण संभव नहीं।

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नौ साल में पांच डीपीआर
घंटाघर के सौंदर्यीकरण की योजना वर्ष 2007 में शुरू हुई थी। तब एक निजी कंपनी ने यह जिम्मा उठाने की बात कही थी, मगर इसमें केवल घड़ी ठीक कराने पर सहमति बनी। डीपीआर बनने के बाद मामला कुछ परवान चढ़ा, लेकिन टेंडर तक पहुंचकर खत्म हो गया। फिर वर्ष 2013 में हुडको के साथ वार्ता आगे बढ़ी और सितंबर 2014 में 56.36 लाख की डीपीआर बनी।
हुडको ने 40 लाख रुपये पर हामी भी भर दी थी, लेकिन फंड क्लीयरेंस नहीं मिल पाई। फिर नगर निगम ने एमडीडीए के साथ मिलकर ओएनजीसी से बातचीत की। इसमें विज्ञापन के मसले पर मामला अटका रहा। इस बीच तीनों विभागों में बात चलती रही। नई डीपीआर भी तैयार की गई, किंतु बजट पर फिर पेंच अड़ गया। बाद में दो नई डीपीआर बनी और पांचवीं डीपीआर मंजूर हुई।

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पेड़ का सामरिक महत्व रहेगा कायम
घंटाघर पर लगे वर्षों पुराने पीपल के पेड़ को लेकर नगर निगम एफआरआइ से वार्ता करेगा। महापौर ने बताया कि विशालकाय पेड़ का सामरिक महत्व कायम रखकर ही घंटाघर का सौंदर्यीकरण होगा। पेड़ का ट्रीटमेंट एफआरआइ करेगा। पहले पेड़ शिफ्ट करने की बात चल रही थी, लेकिन जनविरोध को देखते हुए इसे टाल दिया गया।
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