महापौर पद के लिए रालोद को प्रत्याशियों का टोटा
पिछले विधानसभा चुनाव में करीब तीन सौ उम्मीदवार उतारने वाले राष्ट्रीय लोकदल को नगरीय निकाय चुनाव में प्रत्याशियों का टोटा पड़ा है। ...और पढ़ें

लखनऊ (जेएनएन)। पिछले विधानसभा चुनाव में करीब तीन सौ उम्मीदवार उतारने वाले राष्ट्रीय लोकदल को नगरीय निकाय चुनाव में प्रत्याशियों का टोटा पड़ा है। पहली बार नगरीय निकाय चुनाव में पूरी तैयारियों से उतरने का दावा करने वाला रालोद अब तक सिर्फ चार नगर निगमों समेत 50 नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में ही उम्मीदवार तलाश सका है। आगरा में महापौर पद के लिए लोचन चौधरी नामांकन पत्र दाखिल करा चुके है। वहीं गाजियाबाद से कुसुम सिंह, अलीगढ़ से प्रतीक चौधरी और मेरठ से सोनिया नवल को मेयर पद का प्रत्याशी घोषित किया गया है। मीडिया प्रभारी अनिल दुबे का कहना है कि करीब चार दर्जन पालिका परिषद व नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार तय हो चुके हैं। पार्षद व सभासदों के उम्मीदवारों के फैसले स्थानीय स्तर पर लिए जा रहे हैं।
शहरी क्षेत्रों में सियासी जमीन तैयार करने के प्रयास में जुटे रालोद का टिकट पाने की ललक पश्चिमी उप्र के जाट बाहुल्य वाले जिलों में ही दिख रही है। बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर के अलावा आगरा व मथुरा में रालोद की स्थिति उलटफेर करने की होगी। इसका नुकसान भारतीय जनता पार्टी को होने की संभावना जताते हुए एक पूर्व मंत्री का कहना है कि नगरीय क्षेत्र में चुनाव को लडऩे का फैसला कार्यकर्ताओं को जोड़कर रखने के लिए किया गया है। निकाय चुनाव में भले ही अपेक्षित लाभ न मिल पाए परंतु लोकसभा चुनाव में इस रणनीति से जरूर कामयाबी मिलेगी। गठजोड़ का फैसला स्थानीय स्तर पर ही : निकाय चुनाव में रालोद भले ही किसी दल से सीधे गठजोड़ नहीं कर रहा, लेकिन भाजपा के खिलाफ स्थानीय स्तर पर गठबंधन का फैसला हो सकता है। जिन स्थानों पर रालोद प्रत्याशी नहीं उतारेगा, वहां समर्थन का फैसला स्थानीय नेतृत्व ले सकता है।

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