PreviousNext

गोमती रिवर फ्रंट से जुड़े अफसरों को देना होगा पाई-पाई का हिसाब

Publish Date:Thu, 06 Apr 2017 09:07 AM (IST) | Updated Date:Thu, 06 Apr 2017 09:11 AM (IST)
गोमती रिवर फ्रंट से जुड़े अफसरों को देना होगा पाई-पाई का हिसाबगोमती रिवर फ्रंट से जुड़े अफसरों को देना होगा पाई-पाई का हिसाब
गोमती नदी के जल को प्रदूषण मुक्त करने के बजाय अनेक गैर जरूरी कार्यों पर अत्यधिक धनराशि खर्च की गई है।

लखनऊ (जागरण संवाददाता)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक्शन में आने के बाद गोमती रिवर फ्रंट की जांच शुरू हो गई है। आयोग के गठन के साथ ही इसका आगाज हो गया है। रिवर फ्रंट का काम देख रहे अफसरों को आयोग को पाई-पाई का हिसाब देना होगा। अभियंताओं ने रिवर फ्रंट में खर्चा करने में कतई परवाह नहीं की। सिंचाई विभाग ने नदी की गाद निकालने में ही 54 करोड़ खर्च कर दिया। पक्का पुल से निशातगंज के बीच गाद निकालने का दावा किया गया था। गाद भी निकाली गई लेकिन अब उसे निकालने की जो रकम खर्च दिखाई जा रही है, वह किसी के गले से नहीं उतर रही है।

अनुपयोगी कार्य को कराकर सत्ता से जुड़े ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने में जुटे सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने गोमती पर बनी डायाफ्राम वॉल के पीछे की एंकर दीवार बनाने में भी लापरवाही की थी। यह दीवार सुरक्षा के लिए बनाई जानी थी। कुल डायाफ्राम वाल (दोनों तट पर) 15.8 किलोमीटर में बनाई थी, लेकिन 900 मीटर की एंकर दीवार नहीं बन पाई थी। इसके लिए डायाफ्राम वाल के पीछे मिट्टी निकालने में लापरवाही बरती थी।

गोमती रिवर फ्रंट की खूबसूरती निखारने के लिए रंग-बिरंगी फव्वारे को करोड़ों रुपये लगाकर बाहर से मंगाया गया। एक फव्वारे की कीमत करीब 45 करोड़ बताई जा रही है। दरअसल पूरा प्रोजेक्ट ही अब सवालों के घेरे में है। अब देखना है कि जब आयोग अपनी जांच शुरू करेगा तो किन अफसरों और ठेकेदारों की गर्दन फंसेगी।

बढ़कर 1513 करोड़ की हो गई परियोजना: गोमती रिवर फ्रंट परियोजना के लिए पहले 656 करोड़ रुपये की धनराशि अनुमोदित की गयी थी लेकिन, बाद में बढ़ाकर इसकी पुनरीक्षित लागत 1513 करोड़ रुपये कर दी गई। मुख्यमंत्री ने अपने दौरे में जब अधिकारियों से बातचीत की तो पता चला कि बढ़ी लागत में भी 95 प्रतिशत धन खर्च हो जाने के बावजूद परियोजना का 60 फीसद कार्य ही पूरा हो सका है। इसके अलावा गोमती नदी के जल को प्रदूषण मुक्त करने के बजाय अनेक गैर जरूरी कार्यों पर अत्यधिक धनराशि खर्च की गई है। इन कार्यों को पूरा करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन न किये जाने की भी शिकायतें मिली हैं।

यह भी पढ़ें: अप्रैल मे ही सूख गई आठ में से चार नदियां

समिति के लिए लक्ष्य निर्धारित: सरकार ने तीन सदस्यीय समिति गठित करने के साथ ही जांच का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। समिति को परियोजना की लागत का सत्यापन, क्रियांवयन में विलंब के कारण लागत राशि के 95 फीसद खर्च होने के बावजूद मात्र 60 फीसद कार्य होने के लिए जिम्मेदार लोगों को चिह्न्ति करना, पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से योजना की उपयुक्तता, स्वीकृत मदों के विरुद्ध नियमानुसार भुगतान की स्थिति तथा परियोजना के क्रियांयवन में बरती गई वित्तीय अनियमितता की जांच कर आख्या देनी है। इस समिति को डेढ़ माह का मौका दिया गया है।

यह भी पढ़ें: रेतीली धरा पर सोने की फसल

मोबाइल पर भी अपनी पसंदीदा खबरें और मैच के Live स्कोर पाने के लिए जाएं m.jagran.com पर
Web Title:Officers related to gomti river front will now have to give detail of every penny spent(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

कमेंट करें

हाईकोर्ट का योगी सरकार को आदेश, सात दिन में रिन्यू करें बूचड़खानों के लाइसेंससीएम योगी आदित्यनाथ बोले, यूपी के स्कूलों में पढ़ाई जाएगी विदेशी भाषा
यह भी देखें

जनमत

पूर्ण पोल देखें »