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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 07, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मोदी को तबाह किसानों की नहीं विदेश सैर की फिक्र

By Nawal MishraEdited By:
Published: Tue, 07 Apr 2015 06:25 PM (IST)Updated: Tue, 07 Apr 2015 06:27 PM (IST)

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आज कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मौसम की ...और पढ़ें

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लखनऊ। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आज कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मौसम की मार से तबाह किसानों का हाल पूछने की जरूरत भले नहीं महसूस हो लेकिन वह फ्रांस और जर्मनी की यात्रा पर जा रहे हैं। बारिश और ओले गिरने से प्रभावित किसानों के लिए अब तक राहत पैकेज की घोषणा न कर केंद्र सरकार ने किसानों को नाउम्मीद किया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बोनस खत्म करने से गेहूं की खरीद कम हुई है। कई वर्षों बाद गेहूं आयात हो रहा है। इससे महंगाई बढऩा तय है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में मीडिया से मुखातिब जयराम ने मोदी सरकार के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को किसान व लोकतंत्र विरोधी बताया और कहा, कांग्रेस संसद के अंदर व बाहर इसका पुरजोर विरोध करेगी। 19 अप्रैल को नई दिल्ली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में होने वाली किसान रैली के बाद कांग्रेस मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगी। मोदी सरकार ने अध्यादेश के जरिये सार्वजनिक उपयोग के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीनें हड़प कर निजी कंपनियों और बिल्डरों को सौंपने का इंतजाम कर दिया है। पांच साल तक भूमि का इस्तेमाल न होने पर भी उस पर अनिश्चितकाल के लिए कब्जा करने का रास्ता साफ कर दिया है। वहीं पुराने भू अर्जन कानून के जरिये जिन किसानों की जमीन अधिग्रहीत की जा चुकी है, उनके लिए नये कानून के तहत चार गुना मुआवजा हासिल करने का दरवाजा बंद कर दिया गया है। अध्यादेश के जरिये लाये गए इन संशोधनों ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 का हुलिया ही बिगाड़ दिया है।

बकौल रमेश, जिस भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बनाने के लिए कांग्रेस सरकार को संसद के अंदर व बाहर दो साल लंबी कवायद करनी पड़ी, उसमें संशोधन के लिए मोदी सरकार ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना और अलोकतांत्रिक तरीका अपनाया। इस पर राष्ट्रपति ने भी सवाल उठाया है। दो घंटे में अध्यादेश लाया गया और उसे लोकसभा में तानाशाही से पारित कराया गया लेकिन राज्यसभा में इसे पास कराना सरकार के लिए नामुमकिन होगा। कांग्रेस 2013 के अधिनियम की बहाली के लिए कृत संकल्प है। सपा, बसपा, माकपा, सीपीआइ, जदयू, एनसीपी और डीएमके तो अध्यादेश का विरोध कर ही रहे हैं, राजग के कुछ घटक दल भी नाखुश हैं। खुद भाजपा के अंदर भी अध्यादेश को लेकर मतैक्य नहीं है। जमीन के लिए ही महाभारत हुई थी और कांग्रेस अध्यादेश के खिलाफ यह महाभारत लड़ेगी।