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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 03, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रेलवे में खाना-पीना महंगा, बिना एसी वाले कोच व स्टालों पर लगा 12% जीएसटी

By Kamlesh BhattEdited By:
Published: Mon, 03 Jul 2017 08:49 AM (IST)Updated: Mon, 03 Jul 2017 01:44 PM (IST)

जीएसटी के कारण रेलवे में भी खाना-पीना महंगा हो गया है। बिना एसी वाले कोचों में 12 फीसद, जबकि एसी कोट में 18 फीसद जीएसटी लगेगा।

रेलवे में खाना-पीना महंगा, बिना एसी वाले कोच व स्टालों पर लगा 12% जीएसटी
रेलवे में खाना-पीना महंगा, बिना एसी वाले कोच व स्टालों पर लगा 12% जीएसटी

फिरोजपुर [प्रदीप कुमार]। जीएसटी के दायरे में रेलवे कैटरिंग के भी आ जाने से प्लेटफार्म से लेकर रेलगाडिय़ों के अंदर तक मिलने वाला खाना-पीना महंगा हो गया है। पहली बार प्लेटफार्मों पर स्टॉल व ट्रॉलियों में बिकने वाले खाद्य व पेय पदार्थों पर 12 फीसद टैक्स लगने वाला है।

व्यावसायिक पार्सल पर भी अब पांच फीसद जीएसटी लगना शुरू हो गया है। फिलहाल रेलवे कैटरिंग के जीएसटी की दायरे में आने को लेकर मंडल रेल अधिकारियों में असहजता की स्थिति है। शताब्दी, राजधानी दुरंतो, तेजस, गतिमान, प्रीमियम रेलगाड़ी व अन्य रेलगाडिय़ों के एसी कोच में मिलने वाली खाने-पीने की वस्तुओं पर 18 फीसद के दर से जीएसटी लगेगा, जबकि स्लीपर क्लास व जनरल क्लास के कोच में  खाने-पीने की वस्तुओं पर 12 फीसद टैक्स देना होगा।

उधर,  कैटरिंग में जीएसटी कैसे लागू किया जाए इसके लिए पंजाब, हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर के सुपरवाइजरों की बैठक मंडल हेडक्वार्टर फिरोजपुर में सीनियर डीसीएम मोनू लूथरा व डीसीएम रजनीश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई है। बैठक में जीएसटी पर मंथन हुआ।

एसी कोच में ये होंगे के रेट

एसी कोच में चाय 10 रुपये, ब्रेकफास्ट  66.5 की जगह 80 रुपये, लंच 112 की जगह 135 रुपये में, शाम की चाय 40 की जगह 50 रुपये में, कंबो मेल 66.5 की जगह 80 रुपये में मिलेगा। जबकि दुरंतो व इसकी जैसी दूसरी ट्रेन में सुबह की चाय 6.5 की जगह 10 रुपये, ब्रेकफास्ट 34 की जगह 45 रुपये, लंच 71 की जगह 85 रुपये में और शाम की चाय 18 रुपये की जगह 25 रुपये में मिलगी। 

जल्द जारी होगी रेट लिस्ट

रेलवे कैटरिंग पॉलिसी के माहिर हिमांशु नैय्यर का कहना है कि मंडल अधिकारियों को जल्द रेट लिस्ट जारी करनी चाहिए। समय रहते रेट लिस्ट जारी हो जाती है तो स्टॉल संचालक व कैटरिंग ठेकेदार नुकसान से बच जाएंगे।

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