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    Coronavirus पर इमरान खान ने रोया दुखड़ा तो पीएम मोदी ने दिखाया रास्ता, जानें कैसे

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Sun, 22 Mar 2020 09:02 AM (IST)

    एक तरफ जहां कोरोना दक्षिण एशिया में लगातार पांव पसार रहा है वहीं भारत और पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्रियों का इसको लेकर संबोधन काफी अहम है। लेकिन इसमें जमीन आसमान का अंतर है।

    Coronavirus पर इमरान खान ने रोया दुखड़ा तो पीएम मोदी ने दिखाया रास्ता, जानें कैसे

    नई दिल्‍ली। कोरोना वायरस दक्षिण एशिया में लगातार अपने पांव पसार रहा है। बीते दो सप्‍ताह में पाकिस्‍तान और  भारत में इसके मामलों में काफी इजाफा देखने को मिला है। वहीं इसी सप्‍ताह में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने इसको लेकर अपने-अपने देशवासियों को संबोधित भी किया है। एक तरफ जहां पीएम मोदी ने गुरुवार को इससे से लड़ने के लिए पीएम मोदी ने जो रोड़मैप देशवासियों को दिखाया था तो वहीं दूसरी तरफ मंगलवार को पाकिस्‍तान के पीएम ने इसको लेकर अपना गरीबी का दुखड़ा रोया था। इस लिहाज से इन दोनों नेताओं के संबोधन में जमीन आसमान का अंतर था। आपको यहां पर ये भी बता दें कि दोनों देशों में इसके मरीजों के आंकड़े में भी दोगुने का अंतर है।इसके अलावा पीएम मोदी ने ही सार्क देशों में इसके प्रकोप को रोकने के लिए सबसे पहले पहल करते हुए सभी सदस्‍य देशों से वीडियो कांफ्रेंसिंग की थी और एकजुट होकर उपाय करने को कहा था। 

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    कोरोना वायरस से लड़ने के लिए पीएम मोदी ने जिस तरह से उन्‍होंने देशवासियों का इससे लड़ने के लिए हौंसला बढ़ाया है वह तारीफ के काबिल है। उन्‍‍‍‍‍‍‍होंने जहां इस संबोधन में देशवासियों का भरोसा जीता है और उनपर जो विश्‍वास जताया है उसको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। जनता कर्फ्यू की अपील इसका एक जीता जागता उदाहरण है। इसकी सबसे खास बात ये है इसको देश की जनता खुद अपने मन से करेगी। इसके लिए कोई जोर जबरदस्‍ती नहीं होगी। पीएम मोदी के इस संबोधन में जहां इससे लड़ने की तैयारी के साथ-साथ सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों का भी जिक्र था। 

    अपने संबोधन में उन्‍होंने आने वाले नवरात्र के नौ दिनों का भी जिक्र और देश के हर वर्ग से सहयोग की अपील की। उन्‍होंने इसमें अमीर वर्ग से भी अपील की कि वो उनके यहां पर काम करने वालों द्वारा कोरोना से पीडि़त होने या एहतियातन छुट्टी करने पर उनकी तनख्‍वाह न काटें। इसके अलावा उन्‍होंने ज्‍यादातर लोगों से घर से ही काम करने की अपील भी की। अपने संबोधन में उन्‍होंने इकनॉमिक टास्‍क फोर्स का भी जिक्र किया जो भविष्‍य में इसपर नजर रखेगी और समय-समय पर इसके जरूरी उपाय भी करेगी।

    उनके संबोधन में जमाखोरों पर लगाम लगाने की भी बात थी और लोगों से इस बात की अपील भी थी कि वे जरूरत की चीजों की खरीददारी बेवजह अधिक न करें। उनका कहना था कि जैसा पहले वे घर की जरूरत का सौदा खरीदते आए हैं वैसे ही अब भी करें। उन्‍होंने इस दौरान बुजुर्गों पर विशेष ध्‍यान देने की भी बात की और उन्‍हें घर में ही रहने की सलाह भी दी। उनका कहना था कि हम खुद पर संयंम रखकर ये सब कुछ कर सकते हैं।भारत की ही बात करें तो अब तक कुल 200 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 5 लोगों की मौत हो गई है। इटली से आए शख्स की कोरोना वायरस की वजह से जयपुर में मौत हो गई है।

    वहीं पाकिस्‍तान की बात करें तो वहां पर कुल 464 मामले अब तक सामने आ चुके हैं। इनमें सबसे अधिक मामले सिंध में 238, पंजाब में 96, बलूचिस्‍तान में 81, खैबर पख्‍तूंख्‍वां में 23, गुलाम कश्‍मीर में 24 और इस्‍लामाबाद में 2 मामले सामने आए हैं। इसको लेकर मंगलवार को पीएम इमरान खान ने देश को संबोधित किया था। लेकिन उनके इस संबोधन में इस प्रकोप से लड़ने का कोई रोड़मैप नहीं था। उन्‍होंने अपने संबोधन में ये कहकर लोगों की  धड़कनें जरूर बढ़ा दीं होंगी कि पाकिस्‍तान गरीब मुल्‍क है और इसलिए वह देश में शटडाऊन लागू नहीं कर सकते हैं। हालांकि आपको बता दें कि पीएम मोदी ने भी अपने भाषण में नेशनल शटडाउन की बात नहीं की है। इमरान खान ने इस दौरान कर्ज देने वाली वित्‍तीय संस्‍थाओं से कर्ज माफ करने और रियायत देने की भी अपील की थी। लेकिन इस अपील ने लोगों को इसका अहसास जरूर करवाया होगा कि सरकार के सामने पैसे की कमी उनकी जान पर भारी पड़ सकती है।  

    इमरान खान के संबोधन में कहीं न कहीं अपनी ही जनता पर विश्‍वास की कमी साफतौर पर दिखाई दी। अपने संबोधन में वह कई बार ये दोहराते दिखाई दिए कि घबराना नहीं हैं। हालांकि ये बात सही हो सकती है लेकिन जो डर सरकार के मुखिया की तरफ से जनता में व्‍याप्‍त कर दिया गया वह अपने आप में काफी है। आपको यहां पर ये भी बताना जरूरी होगा कि इन दोनों नेताओं के संबोधन में एक चीज और समान थी, वो थी कालाबाजारी करने वालों पर नकेल कसना। दोनों ही नेताओं ने इसको लेकर कानूनी प्रावधानों का जिक्र करते हुए कालाबाजारी करने वालों को चेतावनी भी दी थी। 

    दोनों नेताओं के संबोधन में कितना अंतर था इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जहां इमरान खान इस बात से आश्‍वस्‍त थे कि ये वायरस से पीडि़त लोगों की तादाद बेहद कम है, वहीं पीएम मोदी ने साफ कहा कि ऐसा समझने और मानने की भूल कतई न करें। इमरान खान ने कहा कि की इससे बुजुर्गों को ज्‍यादा खतरा है क्‍योंकि उनका इम्‍यून सिस्‍टम कमजोर होता है वहीं पीएम मोदी ने कहा कि इससे सबको खतरा और कोई ये न समझे की खतरा छोटा सा ही है। इमरान खान ने जहां ये कहकर अपनी ही पीठ थपथपाई कि जहां अमेरिका समेत यूरापीय देशों ने इसको लेकर काफी देर में उपाय किए वहीं पाकिस्‍तान ने तुरंत इसको रोकने के उपाय किए थे।

    उन्‍होंने ये भी कहा कि देश में 25 फीसद से अधिक लोग गरीबी के हालात में जी रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि नेशनल सिक्‍योरिटी कमेटी बनाई जिसने पूरी दुनिया में फैल रहे कोरोना और वहां उठाए गए उपायों का स्‍टडी किया। इस के अलावा नेशनल कॉर्डिनेट कमेटी बनाई जो सभी प्रांतों के साथ इसको लेकर तालमेल कर रहे हैं। इस दौरान उन्‍होंने ये भी माना कि बलूचिस्‍तान में आज भी लोगों को स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं दे पाना आसान नहीं हैं। हालांकि इसके लिए उन्‍होंने वहां की भौगोलिक परिस्थिति को एक बड़ी वजह बताई, लेकिन इसकी सच्‍चाई हर कोई जानता है।  

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