विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 21, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मोमोज खाए बहुत होंगे लेकिन ये इतनी फेमस कैसे हो गई ये नहीं जानते होंगे

By Abhishek Pratap SinghEdited By:
Published: Wed, 21 Sep 2016 03:16 PM (IST)Updated: Wed, 21 Sep 2016 03:30 PM (IST)

मोमोज डिश बिना तेल-मसाले के स्‍टीम में पकाई जाती है इसलिये शायद यह सभी के दिल पर राज करती है। ...और पढ़ें

News Article Hero Image

मोमोज एक ऐसी डिश है जिसे एक बार खाने पर दिल बार-बार उसी को चाहता है। यह ना केवल दिल्ली और लखनऊ में ही फेमस है बल्कि साउथ में भी लोग इसे बड़ी अच्छी तरह से पहचानने लगे हैं। आप इन्हें सड़कों पर भी बिकता हुआ देख सकते हैं और बडे़-बडे़ रेस्ट्रॉन्ट्स में भी।

मोमोज डिश बिना तेल-मसाले के स्टीम में पकाई जाती है इसलिये शायद यह सभी के दिल पर राज करती है। पर क्या आपने सोचा है कि पूरे भारत में बिकने वाला मोमोज भला यहां तक पहुंचा कैसे? लोग मानते हैं कि मोमोज, नॉर्थ ईस्ट का खाना है, जहां से यह आया है।

पढ़ें- इस खूंखार नक्सली को एक मच्छर के आगे घुटने टेकने पड़े

मोमोज तिब्बत और नेपाल की पारंपरिक डिश है जहां से यह आई। लेकिन नॉर्थ ईस्ट में शिलांग एक ऐसी जगह है जहां अन्य राज्यों की तुलना में सबसे स्वादिष्ट मोमो बिकते हैं। यहां पर मीट से तैयार किये मोमो ज्यादा खाए जाते हैं। मोमो एक चाइनीज शब्द है जिसका मतलब है भाप में पकी हुई रोटी।

शिलांग में मोमोज एक चीनी समुदाय दृारा लाया गया था, जो चीन से आ कर शिलांग में बस गया था। और फिर उसी समुदाय ने चाइनीज फूड, जिसमें खास तौर पर मोमोज (पारंपरिक तिब्बती) की शुरुआत की।

पढ़ें- महिला ने 46 साल बाद दिया एक पथरीले बच्चे को जन्म

इन लोगों का अहम आहार है मोमोज

अरुणाचल प्रदेश के मोनपा और शेरदुकपेन जनजाति, जिसका बॉर्डर पूरी तरह से तिब्बत से जुड़ा हुआ है, उनके आहार का भी एक अहम हिस्सा है। इन जगहों पर मोमोज की फिलिंग में पोर्क और सरसों की पत्तियां तथा अन्य हरी सब्जियां भर कर डाली जाती हैं और फिर इसे तीखी मिर्च के पेस्ट के साथ सर्व किया जाता है।

सिक्किम तक कैसे पहुंचा

मोमोज अब आइये बात करते हैं कि मोमोज सिक्किम तक कैसे पहुंचा? यहां पर मोमोज, भूटिया, लेपचा और नेपाली समुदायों की वजह से पहुंचा, जिनके आहार का हिस्सा मोमोज रहा करता था। सिक्किम में जो मोमोज बनाए जाते हैं, वह तिब्बती मोमोज जैसा ही होता है।

पढ़ें- पैन कार्ड का इस्तेमाल तो करते हो क्या इन नंबर्स का मतलब जानते हो!

1960 के दशक में बहुत भारी संख्या में तिब्बतियों ने अपने देश से पलायन किया, जिसकी वजह से उनकी कुजीन भारत के सिक्किम, मेघालय, पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग और कलिमपोंग के पहाड़ी शहरों और दिल्ली तक पहुंच गई।

किस चीज की होती है फिलिंग

सिक्किम में बीफ और पोर्क मोमोज में भरने के लिये एक पारंपरिक चीज मानी जाती है। लेकिन यहां का क्राउड तो चिकन, वेजिटेबल और चीज से भरे मोमोज का खासा दीवाना है।

पढ़ें- अगर गोरा बच्चा पैदा किया तो मार दिया जाएगा!

मोमो या डिमसम ?

जहां मोमो नेपाल, तिब्बत और भूटान में मोमोज के नाम से जाना जाता है वहीं मोमोज चाइना में अलग नाम "डिमसम" के नाम से जाना जाता है। चाइनीज डिमसम में सूअर का मांस,बीफ, झींगा, सब्जियां और टोफू आदि भरे जाते हैं।

कैसा होता है तिब्बत का मोमो

तिब्बत में तिब्बत को स्टीम और फ्राई, दोनों प्रकार से बनाया जाता है और फिर इन्हें गरम तेल में टमाटर, अदरक, लहसुन और सूखी लाल मिर्च डाल कर फ्राई कर के पेस्ट बना कर गरमा गरम सॉस के रूप में सर्व किया जाता है। तो अगर तिब्बती इसी चीज को मोमोज कहते हैं, तो वहीं चाइनीज इसे डिम सम कह कर पुकारते हैं।

रोचक, रोमांचक और जरा हटके खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।