Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    बिजली-पानी को महंगा करने की जमीन तैयार

    By Rajesh NiranjanEdited By:
    Updated: Wed, 25 Feb 2015 06:53 AM (IST)

    राजग सरकार ने वित्त आयोग की सिफारिशें स्वीकार तो कर ली हैं, लेकिन सार्वजनिक सेवाओं पर पूरा शुल्क वसूलने का सुझाव माना गया तो बिजली, पानी, सड़क जैसी सेवाएं महंगी हो सकती हैं। पहले की तुलना में इस बार के आयोग ने सरकार की तरफ से दी जाने वाली सेवाओं

    नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। राजग सरकार ने वित्त आयोग की सिफारिशें स्वीकार तो कर ली हैं, लेकिन सार्वजनिक सेवाओं पर पूरा शुल्क वसूलने का सुझाव माना गया तो बिजली, पानी, सड़क जैसी सेवाएं महंगी हो सकती हैं। पहले की तुलना में इस बार के आयोग ने सरकार की तरफ से दी जाने वाली सेवाओं की पूरी कीमत वसूलने को लेकर ज्यादा दबाव बनाया है। आयोग चाहता है कि मुफ्त बिजली और पानी आपूर्ति की व्यवस्था बंद होनी चाहिए। साथ ही, इनकी पूरी कीमत भी वसूली जानी चाहिए।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    बिना मीटर न मिले बिजली-पानी

    रिपोर्ट में सीधे तौर पर बिजली की दरों को बढ़ाने की बात नहीं है, लेकिन अधिकांश राज्यों में बिजली की दरों में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं होने पर नाराजगी जताई है। बिजली की लागत में लगातार वृद्धि के बावजूद राज्यों में बिजली की दरें नहीं बढ़ रही हैं। इसके लिए राज्य बिजली नियामक आयोगों की भूमिका की आलोचना करते हुए उन्हें पूरी आजादी देने की मांग की गई है। साथ ही सरकार को समयबद्ध कार्यक्रम के तहत सिर्फ मीटर के जरिये ही बिजली देने की व्यवस्था जल्द से जल्द करने की बात कही है। साथ ही किसानों को रियायती बिजली देने के बावजूद बिजली निकायों को भुगतान नहीं करने वाले राज्यों पर पेनाल्टी लगाने की सिफारिश की गई है। जलापूर्ति को लेकर आयोग का रवैया ज्यादा तल्ख है। उसने कहा है कि शहर हो या गांव, जहां कहीं भी सरकारी पानी की आपूर्ति होती है, वहां वर्ष 2017 तक मीटर लगाने की व्यवस्था होनी चाहिए। हर राज्य में जल्दी जल नियामक आयोग के गठन की प्रक्रिया तेज करने का सुझाव भी केंद्र को दिया गया है, ताकि सिंचाई में इस्तेमाल होने वाले पानी की कीमत भी तय की जा सके।

    रोडवेज के लिए भी बने नियामक

    राज्यों की तरफ से चलाई जाने वाली सार्वजनिक बस व्यवस्था को भी वित्त आयोग ने पूरी तरह से बदलने की बात कही है। इसके लिए राज्यों में एक नियामक आयोग के गठन की सिफारिश की गई है जो बस किराये के साथ ही इनकी सेवा की गुणवत्ता को भी तय करेगा। साथ ही राज्यों के सार्वजनिक परिवहन विभाग के खाते-बही रखने की व्यवस्था को भी सुधारने का सुझाव है, ताकि इनकी सब्सिडी पर नजर रखी जा सके। रेल टैरिफ अथॉरिटी को पूरी स्वायत्ता देने और इसकी सिफारिशों को अमल में लाने का सुझाव आयोग ने दिया है। केंद्र सरकार के लिए इन सुझावों को लागू करना आसान नहीं होगा।

    जल्द होगी बिजली बिल में कमी और मुफ्त पानी की घोषणाः केजरीवाल

    ...तो ऐसे दिल्ली वालों को सस्ती बिजली देगी केजरीवाल सरकार!