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    आतंकवाद पर पाकिस्तान फिर बेनकाब

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    Updated: Mon, 19 Aug 2013 05:38 AM (IST)

    लश्कर आतंकी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा से पूछताछ में भारत में आतंकवाद के पीछे पाकिस्तान का हाथ होने की बात एक बार फिर से सामने आई है।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। लश्कर आतंकी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा से पूछताछ में भारत में आतंकवाद के पीछे पाकिस्तान का हाथ होने की बात एक बार फिर से सामने आई है। टुंडा ने रहस्योद्घाटन किया है कि पाक खुफिया एजेंसी आइएसआइ भारत से भागकर पाकिस्तान पहुंचे आइएम और बीकेआइ (बब्बर खालसा इंटरनेशनल) के आतंकियों की पूरी मदद कर रही है। उन्हें रहने व रोजगार मुहैया कराने के साथ कई नामों से पाकिस्तानी पासपोर्ट भी दिए गए हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की जांच में पाकिस्तान यह कहकर बच जाता है कि उसके यहां रह रहा व्यक्ति पाकिस्तानी नागरिक है।

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    पढ़ें: कौन है आतंकी अब्दुल करीम टुंडा

    टुंडा से पूछताछ में जांच एजेंसियों का फोकस पाकिस्तान में आतंकी संगठनों की गतिविधियां, उनके संरक्षक, धन के स्रोत और आइएसआइ की भारत विरोधी योजना व उसके क्रियान्वयन के तरीके का पता लगाना है। स्पेशल सेल के संयुक्त आयुक्त एमएम ओबेरॉय के अनुसार, अब्दुल करीम उर्फ टुंडा से पूछताछ जारी है। जानकारियों को संबंधित एजेंसियों के साथ साझा किया जा रहा है।

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    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, टुंडा की गिरफ्तारी 26/11 मुंबई हमले के मुख्य हैंडलर अबू जुंदाल से भी बड़ी है। टुंडा के नेटवर्क के आगे जुंदाल कुछ भी नहीं है। आइएसआइ और लश्कर में टुंडा का बड़ा कद है। सत्तर वर्षीय टुंडा को लश्कर चीफ हाफिज सईद काफी सम्मान देता है।

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    पाकिस्तान में आतंकी संगठनों की बैठक में हाफिज सईद व जैश-ए-मोहम्मद चीफ मौलाना मसूद अजहर के साथ टुंडा भी भाग लेता था। अंतरराष्ट्रीय मसलों पर टुंडा से भी राय ली जाती थी। आइएसआइ भी टुंडा के नेटवर्क की मदद से भारत की सीमा में नकली नोट एवं विस्फोटक प्रवेश कराती थी।

    पाकिस्तान में शेखपुरा जिले के मुरीदके में पहले लश्कर तथा अब मरकज-उल-जमात-उद-दावा मुख्यालय के सामने टुंडा का दो मंजिला मकान है। वहां उसकी तीन पत्नियां व छह बच्चे रहते हैं। टुंडा ने बांग्लादेश में 56 साल की उम्र में 18 साल की युवती से तीसरी शादी की थी। टुंडा का वहां इत्र का काम है।

    अधिकारियों के अनुसार, नेपाल व बांग्लादेश में टुंडा का मजबूत नेटवर्क है। वह किसी भी व्यक्ति को इन दोनों देशों में शरण दिला सकता था तथा कुछ भी सामान वहां से भारत पहुंचा सकता था। वह जेहादी भाषणों के लिए भी खासा लोकप्रिय है। टुंडा को युवाओं को जेहाद के नाम पर आतंकवाद की राह पर धकेलने में महारत हासिल है। आइएसआइ ने उसे मदरसे चलाने की जिम्मेदारी सौंपी थी, जहां वह बच्चों को हथियारों की ट्रेनिंग भी दिलाता था।

    एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पाकिस्तान भारत में आतंकवाद फैलाने से इन्कार करता रहा है। लेकिन टुंडा के खुलासे के बाद उसे झुठला पाना मुश्किल होगा। टुंडा से बरामद पाकिस्तानी पासपोर्ट में उसके अब्दुल कुदुस नाम से वहां रहने की पुष्टि होती है। टुंडा हाफिज सईद, मौलाना मसूद अजहर समेत लश्कर व जैश के पूरे नेटवर्क की सच्चाई बयान कर रहा है। दाऊद, रियाज व इकबाल भटकल समेत अन्य आतंकियों के बारे में भी उसने महत्वपूर्ण जानकारी दी है।

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