विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 03, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ढाका हमले पर बोली तस्लीमा, कहा- इस्लाम को शांति का धर्म कहना बंद करें

By Sanjeev TiwariEdited By:
Published: Sun, 03 Jul 2016 07:16 PM (IST)Updated: Sun, 03 Jul 2016 07:58 PM (IST)

तस्लीमा नसरीन ने कहा कि इस्लाम को शांति का धर्म कहना बंद करें। इसके साथ ही उन्होंने इस तर्क को ...और पढ़ें

News Article Hero Image

नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुए आतंकी हमले पर जानी-मानी बांग्लादेशी लेखिका और निर्वासन झेल रहीं तस्लीमा नसरीन ने कहा कि इस्लाम को शांति का धर्म कहना बंद करें। इसके साथ ही उन्होंने इस तर्क को भी खारिज किया कि गरीबी किसी को आतंकवादी बना देती है।

हमले को अंजाम देने वाले हमलावर पढ़े-लिखे और समृद्ध परिवार से वास्ता रखने वाले थे। कई ट्वीट करते हुए तस्लीमा ने सलीम समद का हवाला देते हुए कहा कि बांग्लादेश का वैश्विक आतंक में एक प्रमुख योगदान रहा है।

इससे पहले उन्होंने हमलावरों के संबोधन के मुद्दे पर कहा कि उन्हें इस्लामी आतंकी क्यों नहीं कहा जा रहा है। मीडिया उन्हें गनमैन लिख रहा है। लेकिन उन्होंने लोगों को मारने और उनमें दहशत फैलाने से पहले अल्लाहू अकबर का नारा लगाया। क्या उन्हें इस्लामी आतंकी नहीं कहा जाना चाहिए था?।

तस्लीमा ने अागे लिखा की ढाका हमले का अातंकी निब्रस इस्लाम तुर्की होप्स स्कूल, नार्थ साउथ अौर मोनाश यूनिवर्सिटी में पढ़ा था। इसके बाद उसका इस्लाम के नाम पर ब्रेन वॉश किया गया अौर वह अातंकी बन गया। ढाका हमले के सभी अातंकी अमीर परिवार से थे अौर सभी ने अच्छे स्कूलों में पढ़ाई की थी। कृपया यह मत कहिए की गरीब अौर निरक्षरता लोगों को इस्लामिक अातंकवादी बनाती है। उन्होंने कहा कि इस्लामिक अातंकवादी बनने के लिए गरीबी निरक्षरता, तनाव , अमेरिकी विदेश नीति अौर इस्त्राइल की साजिश की जरूरत नहीं है। अापको इस्लाम की जरुरत है।

पढ़ेंः बांग्लादेश ने हमले के लिए कट्टरपंथी और ISI को ठहराया जिम्मेदार