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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 24, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नोटबंदी के बाद 430 किग्रा सोने में खपा दिया गया 140 करोड़ का कालाधन

By Kamal VermaEdited By:
Published: Sat, 24 Dec 2016 12:54 AM (IST)Updated: Sat, 24 Dec 2016 09:24 AM (IST)

डीआरआइ की छापामारी में पता चला है कि ज्वैलरी निर्यात के लिए मंगाए गए सोने को श्रीलाल महल लिमिटेड कंपनी ने अवैध तरीके से भारतीय बाजार में बेच दिया।

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नोएडा (ललित विजय)। नोएडा विशेष आर्थिक जोन की श्रीलाल महल लिमिटेड कंपनी ने नोटबंदी के बाद 140 करोड़ रुपये के कालाधन को 430 किलोग्राम सोने में खपा दिया। ज्वैलरी निर्यात के लिए मंगाए गए सोने को कंपनी ने अवैध तरीके से भारतीय बाजार में बेच दिया। नोटबंदी के बाद कालाधन खपाने के इस सबसे बड़े खेल का पर्दाफाश डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआइ) नोएडा के छापामारी में हुआ।

डीआरआइ नोएडा की टीम ने 22 और 23 दिसंबर को कंपनी के नोएडा और दिल्ली के कई ठिकानों पर छापेमारी कर 15 किलो सोने के आभूषण, 80 किलोग्राम चांदी की छडें़ और 2.60 करोड़ रुपये नकद जब्त किया। बरामद नकदी में 2.48 करोड़ रुपये के एक हजार और पांच सौ के पुराने नोट हैं, जबकि 12 लाख रुपये 2000 और 500 के नए नोट में है।

छापेमारी के बाद कंपनी के सभी निदेशक खुद को बीमार बता कर अस्पताल में भर्ती हैं। डीआरआइ नोएडा पांच लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। डीआरआइ अधिकारी के अनुसार, फेज दो स्थित नोएडा विशेष आर्थिक क्षेत्र में श्रीलाल महल लिमिटेड कंपनी विदेश से शून्य सीमा शुल्क पर सोना मंगाकर उसके गहने तैयार करती है। जिसे सिर्फ निर्यात किया जा सकता है। आठ नवंबर को नोटबंदी के बाद कंपनी ने 430 किलोग्राम सोना मंगाया। जिसे निर्यात की बजाय भारत के घरेलू बाजार में खपा दिया। जिसकी कीमत अनुमान के अनुसार 140 करोड़ रुपये है।

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एमएमटीसी के माध्यम से भी खरीदा गया सोना

भारत के धातु और खनिज व्यापार निगम लिमिटेड (एमएमटीसी) के माध्यम से भी कंपनी ने विदेश से बड़े पैमाने पर नोटबंदी के बाद सोने की खरीदारी की है। इसके लिए कंपनी ने अपने एक फार्म में आरटीजीएस के माध्यम से बड़ी रकम ट्रांसफर की। इस रकम का इस्तेमाल विदेश से सोना खरीदने में किया गया।

पुराने नोट बदलने में हुआ सोने का इस्तेमाल

डीआरआइ को जानकारी मिली है कि जिस फर्म के जरिये एमएसटीसी से सोना खरीदा गया, उसी फर्म के माध्यम से श्रीलाल महल ने पुराने नोट के बदले भारतीय बाजार में सोना बेच दिया। डीआइआइ अधिकारी अब जांच में जुटे हैं कि भारत में किन-किन लोगों का सोना बेचा गया है। हेराफेरी के बारे में केंद्र सरकार समेत आयकर विभाग व अन्य केंद्रीय एजेंसियों को जानकारी दे दी गई है। जिससे सभी एजेंसियां आगे की कार्रवाई में सहयोग कर सकें।

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विशेष आर्थिक जोन में पकड़ी गई थी हेराफेरी

दिल्ली की डीआरआइ टीम ने 19 दिसंबर को नोएडा के एनएसईजेड स्थित सोना निर्यातक कंपनी महालक्ष्मी ज्वैलर्स में छापा मारा था। जिसमें पता चला था कि दुबई से 150 किलोग्राम सोना आयात किया गया था, लेकिन निर्यात के नाम पर तांबे की बनी ज्वैलरी पर सोने की पालिस कर दिल्ली कार्गो पर भेज दिया गया। आयात सोना को काला धन खपाने के लिए भारतीय बाजार में बेंच दिया गया था। डीआरआइ टीम ने सोना पालिस तांबे के 40 किलोग्राम सोने की ज्वैलरी को जब्त भी किया था। इसके बाद से ही डीआरआइ के निशाने पर नोएडा विशेष आर्थिक जोन में स्थित ज्वैलरी निर्माण फैक्टि्रयां आ गई थी।

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