सार्क सम्मेलन में पाक नहीं जाएंगे पीएम, भारत के समर्थन में तीन अौर देश
आतंकवाद के खिलाफ भारतीय रुख का समर्थन करते हुए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भूटान ने भी इस्लामाबाद बैठक के बहिष्कार का फैसला किया है।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पाकिस्तान में नवंबर में होने जा रहे दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाग नहीं लेंगे। यह फैसला उड़ी आतंकी हमले के विरोध में किया गया है। भारत के इस तरह बहिष्कार करने से नौ नवंबर से इस्लामाबाद में होने वाले दो दिवसीय सम्मलेन का टलना लगभग तय है।
सार्क चार्टर के मुताबिक एक भी सदस्य देश के राष्ट्राध्यक्ष के अनुपस्थित रहने पर शिखर सम्मेलन नहीं हो सकता है। आतंकवाद के खिलाफ भारतीय रुख का समर्थन करते हुए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भूटान ने भी इस्लामाबाद बैठक के बहिष्कार का फैसला किया है। इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान पर और नकेल कसते हुए उससे सर्वाधिक वरीयता प्राप्त राष्ट्र (एमएफएन) का दर्जा छीन लेने का भी संकेत दिया है।
बांग्लादेश ने क्या कहा ?
सार्क सम्मेलन के सिलसिले में बांग्लादेश ने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए उनका देश हमेशा से आगे रहा है। दक्षिण एशिया की तरक्की के लिए संबंधित देशों का एक साथ होना जरूरी है। लेकिन हाल के दिनों में जिस तरह की घटनाएं घटी हैं, उस माहौल में हम किसी सार्थक परिणाम की उम्मीद नहीं कर सकते हैं।
भूटान के क्या कहा ?
भूटान ने कहा कि हाल के दिनों में आतंकी हमले से बातचीत के माहौल पर बुरा असर पड़ा है। इस तरह के हमलों के बाद किसी सार्थक परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती है। सार्क सम्मेलन के सफल होने के लिए जरूरी है कि दक्षिण एशिया में शांति और सद्भाव का माहौल हो।
अफगानिस्तान ने क्या कहा ?
अफगानिस्तान ने कहा कि दक्षिण एशिया में जिस तरह का माहौल बना हुआ है उसमें सार्क सम्मेलन की सार्थकता बेमानी होगी। अफगानिस्तान ने सार्क देशों के चेयरमैन नेपाल को सूचित किया है कि राष्ट्रपति अशरफ गनी व्यस्त रहने की वजह से सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर ने कहा कि उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया असंतोषजनक है। पाकिस्तान की तरफ से पहले जैसे ही बयान आए हैं। सिंधु नदी जलसमझौते पर पाकिस्तान एक तरफा विश्व बैंक से शिकायत नहीं कर सकता है।
MFN पर कल होगी समीक्षा बैठक
इस पर विचार के लिए प्रधानमंत्री ने गुरुवार यानी 29 सितंबर को विशेष बैठक बुलाई है। सिंधु जल संधि की समीक्षा के बाद प्रधानमंत्री का यह एक और कड़ा संदेश है। भारत ने 1996 में ही पाकिस्तान को यह दर्जा दिया था। दोतरफा कारोबारी रिश्ते को मजबूती देने के लिए भारत तभी से पाकिस्तान से भी इस तरह के दर्जे की मांग कर रहा था लेकिन उसने यह दर्जा नहीं दिया। उड़ी हमले के बाद भारत में इसे रद करने की मांग बढ़ती जा रही है।
विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद सम्मेलन में भारत के शामिल नहीं होने के फैसले की जानकारी सार्क के मौजूदा अध्यक्ष देश नेपाल को दे दी है। बता दिया गया है कि सीमा पार से हो रहे आतंकी हमले और एक सदस्य देश द्वाराहमारे आंतरिक मामलों में लगातार दखल से इस्लामाबाद में होने वाले सार्क सम्मलेन की सफलता पर सवालिया निशान लग गया है। इससे पहले भारत ने सम्मेलन में शामिल होने का पाक का न्योता स्वीकार लिया था। ऐसा पहली बार है जब कोई देश सम्मेलन का बहिष्कार करेगा।
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पाक ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सार्क सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेने के भारत के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण कहा है। उसने कहा कि भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के ट्वीट से हमें भारत के फैसले की जानकारी मिली। इस संबंध में हमें आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
फैसला किया, पर दिया नहीं दर्जा
एमएफएन का दर्जा विश्व व्यापार संगठन के मुताबिक एक देश दूसरे को देते हैं ताकि उनके बीच कारोबारी रिश्ते को आसान किया जा सके। पाकिस्तान ने दिसंबर, 2012 में भारत को यह दर्जा देने का फैसला कर लिया था लेकिन बाद में इसे लागू नहीं किया गया। अगर एमएफएन को वापस लिया जाता है तो यह दोनों देशों के आपसी रिश्तों को और तनावग्रस्त कर देगा।
एमएफएन एक नजर में
-1996 में भारत ने पाकिस्तान को एमएफएन का दर्जा दिया
-2.17 अरब डॉलर का निर्यात भारत ने पाकिस्तान को किया 2015-16 में
-0.44 अरब डॉलर का आयात पाकिस्तान से भारत ने किया 2015-16 में
-2.70 अरब डॉलर का कुल द्विपक्षीय व्यापार हुआ दोनों देशों के बीच 2015-16 में
-2.35 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था 2014-15 में
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