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    चालबाज चीन के अड़ंगे से NSG में भारत के लिए फिलहाल दरवाजे बंद

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Fri, 24 Jun 2016 09:05 PM (IST)

    सियोल में एनएसजी के मुद्दे पर चली बैठक आज खत्‍म हो गई। इसके साथ ही खत्‍म हो गया भारत का इसमे शामिल होने का सपना।

    नई दिल्ली (पीटीआई)। न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (एनएसजी) में चीन समेत सात देशों द्वारा भारत का समर्थन न किए जाने के बाद फिलहाल भारत के लिए इसके दरवाजे बंद हो गए हैं। हालांकि समूह के ज्यादातर देश भारत की सदस्यता को तवज्जो देने के लिए राजी थे। लेकिन चीन ने भारत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब इसमें शामिल होने के बाद भारत को फिर से कवायद करनी होगी।

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    हालांकि इसके बावजूद भी इसको भारत सरकार की हार नहीं कहा जा सकता है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इससे पहले एनएसजी को लेकर भारत की इस तरह से पहल कभी सामने नहीं आई। इस मिशन के फेल होने से भारत को निराशा जरूर मिली है। लेकिन यह सफर यहां ही नहीं थमा हैै। भारत यदि इसमें कामयाब हो जाता तो उसका अगला मिशन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सीट हासिल करने का होता।

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    भारत की एनएसजी में सदस्यता को लेकर सियोल में लंबी बैठक चली। लेकिन यहां पर चीन की रणनीति काम कर गई और इस मुद्दे पर आस्ट्रिया, न्यूजीलैंड, तुर्की, स्विटजरलैंड, ब्राजील समेत छह देशों ने समर्थन नहीं किया। चीन ने यहां पर भारत के अप्रसार संधि वाले देशों में शामिल न होने की बात कहकर अडंगा लगा दिया।एनएसजी में भारत की सदस्यता के मुद्दे पर सियोल में आज खत्म हुई दो दिवसीय बैठक में भारत को परमाणु अप्रसार संधि से बाहर का देश बताते हुए साफ कर दिया गया कि उसको कोई रियायत नहीं दी जाएगी। एनएसजी की बैठक में यह साफ कर दिया गया कि भारत को इसकी सभी शर्तें पूरी करनी होंगी।

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    बैैठक के बाद 48 देशों के समूह द्वारा जारी एक बयान में यह भी कहा गया कि वह उन देशों की भागीदारी पर विचार करना जारी रखेगा जिन्होंने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। बयान में कहा गया है कि समूह ने भारत के साथ असैन्य परमाणु सहयोग संबंधी बयान 2008 के सभी पहलुओं पर सूचना को साझा किया तथा भारत के साथ एनएसजी के रिश्तों पर विचार विमर्श किया। बैठक में भाग लेने वाले देशों ने एनपीटी को अंतरराष्ट्रीय अप्रसार व्यवस्था की धुरी बताते हुए इसके पूर्ण और प्रभावी तरीके से लागू करने की बात दोहराई।

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    एनएसजी में यह भी फैसला किया गया कि वर्ष 2017 से 2018 के लिए एनएसजी की कमान स्विटजरलैंड के हाथों में रहेगी और वह अगली बैठक की मेजबानी करेगा। एनएसजी ने ऐसे देशों की संख्या में इजाफे का भी स्वागत किया जिन्होंने अपनी राष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था को एनएसजी के दिशा निर्देशों और नियंत्रण सूची के समरूप बनाया है।

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