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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 02, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सब पूछ रहे, खाते में 15 लाख कब आएंगे: नीतीश

By Sachin kEdited By:
Published: Tue, 02 Dec 2014 09:20 PM (IST)Updated: Tue, 02 Dec 2014 11:41 PM (IST)

जद (यू) नेता व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लोकसभा चुनाव में बिहार में भाजपा से मिली करारी हार ...और पढ़ें

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जद (यू) नेता व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लोकसभा चुनाव में बिहार में भाजपा से मिली करारी हार का दर्द अब भी भुला नहीं पाए हैं। यहां सुशासन पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि अब हर व्यक्ति पूछ रहा है कि भाजपा ने जो वादा किया था, उसके मुताबिक उनके खाते में 15 लाख रुपये कब आएंगे। उन्होंने भाजपा पर अल्पसंख्यक समुदायों की उपेक्षा का आरोप भी लगाया।

नीतीश ने कहा कि किसी देश के विकास का पैमाना सिर्फ सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) नहीं हो सकता। बल्कि यह भी देखना होगा कि आम आदमी को इस विकास का कितना लाभ मिला। भाजपा को मिले अपार बहुमत पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों के दौरान लोगों ने कई आंदोलनों को देखा। परिणाम क्या हुआ। अंततोगत्वा भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला।

मगर देश में इसे सिर्फ 31 फीसदी वोट मिले। इतने कम वोट पर भी इन्हें पूर्ण बहुमत मिल गया। काले धन पर सरकार के रुख की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि अब काले धन पर संसद में चर्चा होती है तो सरकार कहती है कि चुनाव के दौरान जो कहा- सो कहा। यह सुशासन की निशानी नहीं है। ..अब हर व्यक्ति पूछ रहा है कि भाजपा ने चुनाव में जो वादा किया था, उसके मुताबिक उनके खाते में 15 लाख रुपये कब आएंगे।

भाजपा पर अल्पसंख्यकों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि आम चुनाव में भाजपा के 282 सदस्य जीते, लेकिन प्रमुख अल्पसंख्यक समुदाय का एक भी नहीं। इसी तरह नौ राज्यों में इनकी अपनी या सहयोगी दलों की सरकार है। इनमें कुल 1,352 विधायक हैं। उनमें महज 22 ही मुस्लिम या ईसाई समुदाय के हैं।

इन राज्यों के कैबिनेट में 151 मंत्री हैं। उनमें सिर्फ एक मंत्री इन समुदाय का है। नीतीश ने आरोप लगाया कि एक ओर संविधान सरकार को लोगों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की बात कहता है, लेकिन यह सरकार मिथकों व पौराणिक गाथाओं को इतिहास के रूप में पेश कर रही है।

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