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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 02, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में उतरा नेशनल बुक ट्रस्ट

By Ravindra Pratap SingEdited By:
Published: Sat, 02 Sep 2017 12:46 AM (IST)

एनबीटी जल्द ही हिंदी की तरह संस्कृत भाषा में के लेखकों को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ नई योजनाएं लांच कर सकती है।

संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में उतरा नेशनल बुक ट्रस्ट
संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में उतरा नेशनल बुक ट्रस्ट

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) अब देववाणी संस्कृत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में भी उतरेगा। इसकी शुरुआत वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से करेगा। जहां अगले हफ्ते 9 से 17 सितंबर के बीच संस्कृत बुक फेयर का आयोजन किया गया है। खासबात यह है कि इस पूरे आयोजन में एनबीटी ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की भी मदद ली है। इसके अलावा देश के अलग-अलग शहरों में देववाणी संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए कुछ नए कार्यक्रम भी आयोजित करने की तैयारी है। जिसमें संस्कृत विद्वानों को सम्मानित करने, परिचर्चा जैसे कार्यक्रमों की रुपरेखा तय की गई है।

मानव संसाधन मंत्रालय से जुड़ी स्वायत्त संस्था एनबीटी से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक पहली बार एनबीटी की ओर से संस्कृत बुक फेयर जैसा आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान एनबीटी की ओर से संस्कृत भाषा की पहली प्रकाशित पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा। जो गांधी जी के जीवन से जुडी है। जिसमें गांधी जी के जीवन को संस्कृत के सौ श्लोक के जरिए बताया गया है। किताब का नाम गांधी तत्व-सतकम् रखा गया है।

एनबीटी के मुताबिक वह जल्द ही हिंदी की तरह संस्कृत भाषा में लेखन करने वाले लेखकों को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ नई योजनाएं लांच कर सकती है। फिलहाल एनबीटी का फोकस पहले दौर में लोगों में संस्कृत भाषा के प्रति आकर्षण को बढ़ाने और उससे जुड़े लेखन को लोगों के बीच आसानी से पहुंचाने का है। जिस दिशा में वह तेजी से काम कर रही है। एनबीटी की माने तो पिछले कुछ समय से संस्कृत से जुड़ा लेखन बाजार से लगभग गायब सा हो गया है। लेकिन इस नई पहले से अब इसको नए सिरे से स्थापित करने में मदद मिलेगी।

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