ओबामा स्टाइल में दिखे मोदी, भीड़ पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
हैदराबाद में रैली की भीड़ देख नरेंद्र मोदी काफी उत्साहित थे। तेलगू में अपनी भाषण की शुरुआत करते हुए मोदी ने नौजवानों के बीच से ओबामा की तरह नारे लगाए। ...और पढ़ें

नई दिल्ली। हैदराबाद में रैली की भीड़ देख नरेंद्र मोदी काफी उत्साहित थे। तेलगू में अपनी भाषण की शुरुआत करते हुए मोदी ने नौजवानों के बीच से ओबामा की तरह नारे लगाए। 'यस वी कैन..[हां हम कर सकते हैं], यस वी वील डू [हां हम करेंगे]। इसके अलावा उन्होंने 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारे भी लगवाए।
हालांकि मोदी की यह स्टाइल कांग्रेस को पसंद नहीं आई है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि मोदी के इस स्टाइल से कोई फायदा नहीं होने वाला है। मोदी की सभा में जो भीड़ दिख रही थी, ऐसी भीड़ किसी चुनावी सभा में नहीं दिखी। समझ नहीं आ रहा है कि ऐसी भीड़ कैसे जुटाई गई। उन्होंने कहा कि कहा से लाए गए लोग कितने पैसे दिए गए।
भाजपा का चेहरा बने मोदी गुजरात की धरती से निकलकर धीरे-धीरे पूरे देश में अपनी जमीन तैयार करने लगे हैं। इसी क्रम में मोदी ने हैदराबाद में 'नवभारत युवाभेरी' के जरिये नौजवानों को संबोधित किया और कांग्रेसनीत केंद्र सरकार की नाकामियों को गिनाते हुए भविष्य का एक सपना भी दिखाया। देश में शासन, प्रशासन और विकास का मंत्र दिया, तो राजनीतिक लिहाज से पूरी भाजपा और नेतृत्व को एकजुटता में बांधते हुए राजग विस्तार का खाका बनाने की भी कोशिश की। और, अंत में 'यस वी कैन, यस वी विल डू', 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारों में रैली में जुटे करीब एक लाख नौजवानों का सुर जोड़कर मिशन-2014 के लिए रणभेरी बजा दी।
तेलुगु से अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए मोदी ने भाषण में हर पहलू को छुआ और 'कांग्रेस मुक्त' भारत का नारा दिया। सीमांध्र और प्रस्तावित तेलंगाना की संयुक्त राजधानी हैदराबाद से खुद को जोड़ते हुए उन्होंने देश के नेतृत्व पर सवाल खड़ा किया। केंद्र की विदेश व रक्षा नीति से लेकर आर्थिक नीति को कठघरे में खड़ा किया और सरकार की अपनी कल्पना सामने रख दी। पाकिस्तान और चीन के सामने लगातार लाचार दिखती रही सरकार का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, सरकार का एक ही मजहब होता है वह है 'इंडिया फर्स्ट' और एक ही धर्मग्रंथ होता है और वह है 'भारत का संविधान'। लेकिन, वर्तमान भारत सरकार के लिए वोट बैंक की राजनीति सबसे ऊपर है।
एलबी स्टेडियम के अंदर और बाहर खड़ी भीड़ की भावना को छूते हुए उन्होंने कहा, दिल्ली की सल्तनत ने एक के बाद एक लगातार ऐसे काम किए जिससे राजनेताओं पर जनता का भरोसा उठ गया। यह भरोसा दोबारा कायम करना है तो जनशक्ति के विकास का मंत्र लेकर आगे चलना होगा और सबको विकास की धारा में जोड़ना होगा। शायद वर्तमान सरकार के पास विकास की सोच नहीं है।
तेलंगाना गठन भाजपा का संकल्प रहा था, लेकिन मोदी सीमांध्र को अलग छोड़ना नहीं चाहते। लिहाजा उन्होंने दोनों की भावना को सहलाया, साथ ही तेलुगु देसम पार्टी [टीडीपी] और अन्नाद्रमुक को चारा भी दिया। वर्तमान कटुता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा दोनों राज्यों का समानांतर विकास चाहती है। इसके लिए सोच और इच्छाशक्ति होनी चाहिए। भीड़ से उन्होंने 'जय तेलंगाना', 'जय सीमांध्र' का नारा लगवाकर एकजुटता का संदेश दिया।
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