लोकसभा में जीएसटी पर लगी मुहर
लोकसभा में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर बुधवार को मुहर लग गई। लोकसभा में इस विधेयक को संसद की स्थायी समिति में भेजने की मांग स्पीकर की तरफ से खारिज होने के बाद इस पर चर्चा शुरू हो गई। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली
नई दिल्ली। लोकसभा में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर बुधवार को मुहर लग गई। लोकसभा में इस विधेयक को संसद की स्थायी समिति में भेजने की मांग स्पीकर की तरफ से खारिज होने के बाद इस पर चर्चा शुरू हो गई। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष की इस मांग का विरोध करते हुए दलगत भावना से ऊपर उठ इसे पारित करवाने का अनुरोध किया। हालांकि, राज्यसभा में इस बिल के भविष्य को लेकर संदेह अभी बना हुआ है, क्योंकि कांग्रेस इसे स्थायी समिति के पास भेजने पर अड़ी है।
लोकसभा में इस विधेयक को लेकर सरकार को कोई मुश्किल नहीं होगी। इस विधेयक पर तृणमूल कांग्रेस ने चर्चा के दौरान स्पष्ट कर दिया कि वह इस बिल के पक्ष में है। भारतीय जनता पार्टी के बाकी मित्र दल भी इस विधेयक पर उसके साथ हैं। भाजपा इसके लिए अपने सांसदों को व्हिप भी जारी कर चुकी है। असली दिक्कत सरकार को राज्यसभा में होगी, जहां उसके पास बहुमत नहीं है।
चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है, इसलिए इसे पास कराने के लिए सदन के दो तिहाई सांसदों का समर्थन आवश्यक होगा। यही वजह है कि लोकसभा में यह बिल बुधवार को 12 बजे वोटिंग के लिए रखा जाएगा, ताकि सदन में अधिक से अधिक सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।
बुधवार को कांग्रेस व भाजपा दोनों के संसदीय दल की बैठक होनी है। संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू सभी सहयोगी दलों के नेताओं के साथ मंगलवार को बैठकों में व्यस्त रहे। मकसद यही था कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में सांसदों की वोटिंग के दौरान उपस्थिति सुनिश्चित हो सके।
अलबत्ता राज्यसभा में कांग्र्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने पार्टी की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका दल सैद्धांतिक तौर पर जीएसटी के समर्थन में है। लेकिन कांग्रेस इस बिल का समर्थन नहीं करती, क्योंकि इसकी अभी और समीक्षा की आवश्यकता है। इसलिए पार्टी इसे स्थायी समिति के पास भेजे जाने की मांग कर रही है।
इससे पहले कांग्रेस सहित अन्नाद्रमुक, माकपा व बीजद ने जीएसटी बिल को स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की थी। इसे डिप्टी स्पीकर एम थंबीदुरई ने खारिज कर दिया।
चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद एम वीरप्पा मोइली ने कहा कि कांग्रेस जीएसटी का तो समर्थन करती है, लेकिन जिन प्रावधानों के साथ राजग सरकार बिल को पास कराने की कोशिश कर रही है, उससे राज्यों को नुकसान होगा। संप्रग ने जिस वस्तु व सेवा कर विधेयक के मसौदे को तैयार किया था, उसमें वोटिंग के लिए विशेष मैकेनिज्म बनाया गया था, मगर मौजूदा सरकार ने नए बिल में इसे समाप्त कर दिया है।
सभी राज्यों को होगा फायदा : जेटली
इससे पहले जेटली ने कहा कि इस बिल के पास होने से सभी राज्यों को फायदा मिलने लगेगा। साथ ही यह अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं के लिए भी फायदेमंद होगा। आकलन के मुताबिक जीएसटी बिल पास होने से सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में एक से दो फीसद की बढ़ोतरी होगी।
ओडिशा व बंगाल जैसे राज्यों की बात करें तो जीएसटी लागू होने के पहले दिन से इन राज्यों को लाभ होगा। जीएसटी बिल पर पहले ही काफी देरी हो चुकी है। ऐसे में यदि एक बार फिर विलंब किया जाता है, तो इससे राज्यों का ही नुकसान होगा।
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