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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 02, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

शास्त्री का अस्थि कलश संग्रहालय में 'कैद'

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Published: Wed, 02 Oct 2013 03:53 AM (IST)Updated: Wed, 02 Oct 2013 03:54 AM (IST)

उद्देश्यों में नेक सोच होती है लेकिन कार्य में ईमानदारी नहीं। ऐसे में परिणति कुछ अलग होती है। देश के ...और पढ़ें

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मथुरा, [नवनीत शर्मा]। उद्देश्यों में नेक सोच होती है लेकिन कार्य में ईमानदारी नहीं। ऐसे में परिणति कुछ अलग होती है। देश के अमर सपूत लाल बहादुर शास्त्री का ऐसा व्यवहार और ईमानदारी थी कि देश के नीति-नियंता चाहते थे कि लोग हर पल उनसे प्रेरणा लें। इसी सोच के साथ उनकी अस्थियों का कलश मथुरा राजकीय संग्रहालय में रखवाया गया। दुर्भाग्य! यह धरोहर भार मान ली गई है, इसलिए इसे यहां ताले में बंद कर दिया गया।

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मथुरा राजकीय संग्रहालय में दुर्लभ मूर्तियों और कलाकृतियों का खजाना है। एशिया में जाना-माना संग्रहालय होने की वजह से यहां बड़ी संख्या में देसी-विदेशी पर्यटक आते हैं। ऐसे में यहां देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के अस्थि कलश रखने का फैसला लिया गया। संग्रहालय सूत्रों के अनुसार साठ के दशक में किसी वक्त दोनों के अस्थि कलशों को यहां लाया गया। इन्हें दर्शकों के लिए रखा जाना था लेकिन गोदाम में रख दिया गया। इसके बाद से दोनों के कलश बाहर ही नहीं निकल सके। अब तो च्जदातर लोगों को यह बात मालूम ही नहीं है कि ये अस्थि कलश संग्रहालय में मौजूद भी हैं। वैसे इस बीच देशभर के विभिन्न क्षेत्रों के आई कुछ महत्वपूर्ण कलाकृतियां भी गोदाम में रख दी गई। इनमें से च्जदातर बुद्धकालीन हैं और पुरातत्व दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन्हें भी दर्शकों से दूर रखा जाता है। अब जब कभी इनको बाहर निकालने के लिए आवाज उठती है तो जगह की कमी की बात कह दी जाती है।

हर चीज दीर्घा में लगाना जरूरी नहीं: निदेशक

संग्रहालय के सहायक निदेशक डॉ. एसपी सिंह से जब इन्हें सार्वजनिक न करने के बारे में पूछा गया, तो उनका कहना था कि यह आवश्यक नहीं कि हर चीज दर्शकों के देखने के लिए दीर्घा में लगाई जाए।

जयंती पर बाहर आने चाहिए कलश: माथुर

प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रदीप माथुर कहते हैं कि यह कलश देश की बहुमूल्य धरोहर हैं। इन महान नेताओं की जयंती पर तो इन्हें दर्शनों के लिए बाहर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह संग्रहालय निदेशक से बात कर कलशों को दर्शकों के लिए गैलरी में प्रदर्शित कराएंगे।

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