स्मृति से बोले शरद... कौन हैं आप
महिलाओं के रंग रूप पर अपनी टिप्पणियों को लेकर शरद यादव राज्यसभा में सोमवार को महिला सांसदों के निशाने पर रहे। हंगामे के बीच जदयू प्रमुख यादव ने अपने पूर्व के रुख पर कायम रहते हुए बहस की चुनौती दे डाली। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के तल्ख तेवरों
नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। महिलाओं के रंग रूप पर अपनी टिप्पणियों को लेकर शरद यादव राज्यसभा में सोमवार को महिला सांसदों के निशाने पर रहे। हंगामे के बीच जदयू प्रमुख यादव ने अपने पूर्व के रुख पर कायम रहते हुए बहस की चुनौती दे डाली। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के तल्ख तेवरों पर झल्लाए यादव ने कहा 'कौन हैैं आप? मंत्री रहकर के बैठिए और मेरी बात सुनिए।' हालांकि यादव के इस रुख पर संसद की सभी महिला सांसद एकजुट हो गईं। उपसभापति ने भी बहस कराने की अनुमति नहीं दी।
राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही शरद यादव के विवादित बयान पर महिला सांसदों ने एतराज करना प्रारंभ कर दिया। अपने बयान पर अड़े शरद यादव को जहां महिला सदस्यों की खरी खोटी सुननी पड़ी, वहीं उपसभापति ने उनकी बहस के आग्र्रह को नकार दिया। स्मृति ईरानी ने यादव के खिलाफ हमलावर तेवर अपनाते हुए उन्हें शांत रहने और माफी मांगने को कहा।
ईरानी ने तल्ख लहजे में कहा कि महोदय (यादव) महिलाओं की चमड़ी का रंग देखकर कोई टिप्पणी न करें। इससे बहुत गलत संदेश जा रहा है। उपसभापति पीजे कुरियन के साथ अन्य सांसदों ने भी यादव की चुनौती और इस मसले पर बहस कराने की उनकी मांग का विरोध किया। कुरियन ने कहा कि वह गोरे व काले विषय पर बहस की अनुमति नहीं दे रहे हैं। यह शर्मनाक है।
यादव ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि आखिर उन्होंने क्या कहा है? सांवली महिलाएं भारत में ज्यादा हैं। विश्व में भी उनकी संंख्या अधिक है। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान यादव ने कहा कि इस संबंध में लोहिया के संघर्ष पर वह किसी से भी बहस को तैयार हैं। दूरसंचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने जद यू नेता यादव के बयान से खुद को अलग करते हुए कहा कि उन्हें इस विवाद से न जोड़ा जाए। मैं इस बयान की निंदा करते हुए महिलाओं की आदर करते हैं। यादव से आग्रह करते हैं कि वह अपने बयान को वापस ले लें।
जागरण विचार
इसका कोई औचित्य नहीं कि विदेशी पूंजी पर चर्चा के दौरान दक्षिण भारतीय महिलाओं के सांवले शरीर और उनके नृत्य कौशल की चर्चा की जाए। इससे बेढब यह है कि इस पर आपत्ति के जवाब में महिला मंत्री तक को झिड़क दिया जाए और फिर यह कहा जाए कि इस पर बहस हो जाए कि दुनिया में सांवली महिलाएं ज्यादा हैं या गोरी? यह अपनी गलती छिपाने और मामले को दूसरा मोड़ देने का विचित्र उदाहरण है। ज्यादा गंभीर यह है कि ऐसा उदाहरण पेश करने वाले सांसद अपने रवैये पर अड़े हैं और कुछ अन्य सांसद उनका बचाव कर रहे हैं। क्या किसी को यह अहसास नहीं कि संसद की साख के लिए ऐसे प्रसंग ठीक नहीं?
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