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    जानिए, जयललिता का अभिनय से राजनीति तक का सफर

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Thu, 19 May 2016 05:23 PM (IST)

    जयललिता ने तमिलनाडु में फिर जीत दर्ज अपने विरोधियों का मुंह बंद कर दिया है। उन्‍होंने बता दिया कि जिस तरह से वह पूर्व में सफल अभिनेत्री थीं वैसे ही वह आज सफल नेता भी हैं।

    नई दिल्ली। जयललिता का जन्म 24 फरवरी 1948 को एक तमिल परिवार में हुआ। वह पुराने मैसूर राज्य के मांड्या जिले के पांडवपुरा तालुक के मेलुरकोट गांव में पैदा हुई थीं। उनके दादा एक सर्जन थे। महज 2 साल की उम्र में जयललिता के पिता की मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद जयललिता की मां उन्हें बेंगलुरु लेकर चली आईं। यहीं से जयललिता ने तमिल सिनेमा में काम करना शुरू कर दिया।

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    जब जयललिता स्कूल में पढ़ रही थीं तभी उनकी मां ने उन्हें फिल्मों में काम करने को राजी कर लिया। और इसी दौरान उन्होंने 'एपिसल' नाम की अंग्रेजी फिल्म में काम किया। 15 की उम्र में जयललिता कन्नड़ फिल्मों में मुख्य अभिनेत्री की भूमिकाएं करने लगीं। इसके बाद वह तमिल फिल्मों में काम करने पहुंचीं। अभिनेता शिवाजी गणेशन के साथ भी फिल्में करके उन्होंने खूब ख्याति बटोरी। जयललिता ने हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता धर्मेंद्र के साथ भी काम किया।

    जयललिता: अभिनय और प्लेबैक सिंगिंग से लेकर राजनीति तक का सफर

    जयललिता राजनीति में आने से पहले एक लोकप्रिय अभिनेत्री थीं। उन्होंने तमिल, तेलुगू, कन्नड़ फिल्मों के अलावा एक हिन्दी फिल्म में भी काम किया है। उन्होंने सिनेमा को अलविदा कहकर राजनीतिक दुनिया में कदम रखा था। जयललिता अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कजगम पार्टी से हैं और उनके समर्थक उन्हें 'अम्मा' कहकर पुकारते हैं।
    वैसे तो माना जाता है कि एमजी रामचंद्रन ने जयललिता की राजनीति में एंट्री करवाई थी। जयललिता ने तमिलनाडु से राज्यसभा के लिए प्रतिनिधित्व किया था। लेकिन रामचंद्रन की मौत होते ही जयललिता ने खुद को उनकी विरासत का वारिस घोषित कर दिया।

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    एम करुणानिधि की पार्टी द्रमुक से टूटने के बाद एमजीआर ने अन्नाद्रमुक का गठन किया। साल 1983 में एमजीआर ने जयललिता को पार्टी का सचिव नियुक्त किया था। बाद में राज्यसभा के लिए मनोनित किया गया।
    जयललिता पहली बार साल 1991 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। हालांकि 1996 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। जयललिता पर आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में केस चला, जिसमें वह दोषी भी पाई गईं। बेंगलुरु की अदालत ने जयललिता को चार साल की सजा सुनाई।

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    जयललिता 2001 में फिर मुख्यमंत्री बनने में सफल रही थीं। भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त होने के बाद कोर्ट से सजा होने के बावजूद जयललिता अपनी पार्टी को चुनावों में जिताने में कामयाब रहीं। उन्होंने गैर चुने हुए मुख्यमंत्री के तौर पर कुर्सी संभाली। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियुक्ति को अवैध घोषित कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी कुर्सी अपने विश्वसनीय मंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम को सौंप दी। जब उन्हें मद्रास हाईकोर्ट से कुछ राहत मिली तो वह मार्च 2002 में फिर से मुख्यमंत्री बन गईं।

    इसके बाद वह 2011 में भी मुख्यममंत्री बनीं। तब से वह राज्य की मुख्यमंत्री हैं। गरीबों के लिए योजनाएं शुरू करके वह आम लोगों में काफी पॉपुलर हो गईं। जयललिता के जीवन पर बनी एक तमिल फिल्म 'इरूवर' आई थी जिसमें जयललिता की भूमिका ऐश्वर्या राय ने निभाई थी।

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