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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 08, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अपने फूड कूपन बेचकर पढ़ाई करने वाले ऋतुराज को मिला 80 लाख का पैकेज

By Kamal VermaEdited By:
Published: Fri, 08 Jul 2016 05:04 PM (GMT+05:30)Updated: Fri, 08 Jul 2016 05:13 PM (GMT+05:30)

पढ़ाई के लिए कभी अपने फूड कूपन बेच देने वाले एमपी के ऋतुराज को माइक्रोसॉफ्ट ने 80 लाख का पैकेज दिया है।

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इंदौर (नई दुनिया) मुझे देश के विभिन्न् हिस्सों में होने वाली वर्कशॉप में जाकर नई तकनीकें सीखने और अपना हुनर दुनिया को दिखाने का जुनून था। एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने के कारण हर महीने एक निश्चित पॉकेटमनी ही पैरेंट्स भेजते थे। ऐसे में कई बार वर्कशॉप में शमिल होने के लिए रुपयों की कमी पड़ी तो कैंटीन में खाना खाने के लिए मिलने वाले फूड कूपन अपने दोस्तों को बेच देता था।

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कई बार तो मंदिरों में जाकर भी खाना खाया। अपने हुनर को निखारने के लिए ऐसे हालातों का सामना करने बाद वाराणसी से इंदौर इंजीनियर बनने का सपना लिए आए रितुराज ने मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड 80.52 लाख रुपए का सालाना पैकेज हासिल किया है। ओरिएंटल विश्वविद्यालय में ईसी ब्रांच में इंजीनियरिंग के छात्र रितुराज माइक्रोसॉफ्ट के वॉशिंगटन ऑफिस में बतौर प्रोग्राम मैनेजर अपनी सेवाएं देंगे। ओरिएंटल विवि के कुलाधिपति डॉ. केएल ठकराल ने कहा कि किसी भी दूसरे कॉलेज के बजाए हमारे स्टूडेंट को इतना बड़ा पैकेज मिलने का कारण है कि हमारा लक्ष्य हमेशा ही प्रोफेशनल्स तैयार करना रहा है।

औसत विद्यार्थी था स्कूल में

रितुराज बताते हैं कि स्कूल में मैं हमेशा एक औसत ही था, लेकिन पापा प्रदीप कुमार सिंह, जो खुद आईआईटी पासआउट हैं व छात्रों को प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं, हमेशा कहा करते थे कि रट कर 90 प्रतिशत हासिल करने से बेहतर है कि कंसेप्ट को समझकर 50 प्रतिशत ही हासिल कर लो।

रितुराज ने कहा कि स्कूल के समय में मुझे कम्प्यूटर में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। एक बार 10वीं कक्षा में कम्प्यूटर टीचर ने यहां तक कह दिया था कि कभी बाहर किसी को बताना नहीं कि तुम मेरे स्टूडेंट हो। रितुराज ने बताया कि मुझे सपोर्ट करने के लिए मम्मी मधु सिंह ने अच्छी शिक्षा हासिल होने के बाद भी जॉब नहीं की।

60 देशों के टेक्नोके्रट्स का किया प्रतिनिधित्व

रितुराज ने बताया पिछले वर्ष उन्हें माइक्रोसॉफ्ट के एक प्रोग्राम के तहत अमेरिका बुलाया गया था। इस प्रोग्राम में माइक्रोसॉफ्ट ने 60 देशों के सबसे बेहतरीन टेक्नोके्रट्स को अमेरिका आमंत्रित किया थाा। भारत से चयनित होने वाले रितुराज एकमात्र छात्र थे।

अमेरिका में 60 टेक्नोक्रेट्स का प्रतिनिधित्व रितुराज को दिया गया था। वहीं पर उन्होंने 8 घंटे में 10 साल से कम उम्र के प्रोग्रामिंग न जानने वाले 18 हजार बच्चों को एकसाथ प्रोग्रामिंग सिखाई थी। 8 घंटे की ट्रेनिंग के बाद ही सभी बच्चों ने एक सॉफ्टवेयर और एक कम्प्यूटर गेम की प्रोग्रामिंग की थी। इसके बाद रितुराज माइक्रोसॉफ्ट वुमंस इनटेक प्रोग्राम से जुड़े और 40 हजार महिलाओं को आईटी सेक्टर से जोड़ा। उनकी इस परफॉर्मेंस के बाद ही माइक्रोसॉफ्ट ने उन्हें जॉब के लिए आमंत्रित किया।