विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 12, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

यूपी में जेलों से फल-फूल रहा रंगदारी का धंधा

By Edited By:
Published: Mon, 12 Aug 2013 09:39 AM (GMT+05:30)Updated: Mon, 12 Aug 2013 10:39 AM (GMT+05:30)

सूबे की जेलों से रंगदारी वसूली में जुटे माफिया ने कारोबारी, बिल्डर्स, ठेकेदारों और पूंजीपतियों के होश उड़ा दिए हैं। ...और पढ़ें

News Article Hero Image

लखनऊ [आनन्द राय]। सूबे की जेलों से रंगदारी वसूली में जुटे माफिया ने कारोबारी, बिल्डर्स, ठेकेदारों और पूंजीपतियों के होश उड़ा दिए हैं। बहुत कम ऐसे लोग हैं जो माफिया के फरमान के बाद पुलिस का दरवाजा खटखटाने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं। वरना एक इशारे पर उनके गुर्गो को मुंहमांगी रकम देने में जरा भी देर नहीं लगा रहे हैं।

ठेके-पट्टों में हिस्सेदारी से लेकर छोटी-बड़ी पंचायतें जेलों में हो रही हैं। शनिवार को एसटीएफ ने सुलतानपुर जेल में बंद माफिया मुन्ना बजरंगी के दो गुर्गो रितुराज और रजनीश को पकड़ा तो एक बार फिर यह सच्चाई सामने आयी। बजरंगी ने नोएडा के एक बिल्डर को विवादित जमीन छोड़ने और सुलतानपुर जेल में आकर मिलने की धमकी दी थी। बजरंगी ने इस अभियान की कमान इन्हीं दोनों को सौंपी थी। राजनीतिक वरदहस्त के चलते बिल्डर ने तो पुलिस तक जाने की हिम्मत जुटा ली, लेकिन सूबे में जेलों से निकले 'फरमान' के खौफ से बहुतों के कदम ठिठके हैं। इसलिए कि जेलों से हत्या की भी साजिशें हो रही हैं। गाजीपुर के विधायक कृष्णानंद राय से लेकर आजमगढ़ के पूर्व विधायक सर्वेश सिंह की हत्या की साजिश जेल से ही रची गयी। सर्वेश की हत्या के बाद तो एडीजी अरुण कुमार ने दो टूक कहा कि जेलों से आपराधिक गिरोह संचालित हो रहे हैं। इसकी एक और बानगी देखें। छह अगस्त को राजन नामक एक अपराधी के पकड़े जाने के बाद यह राजफाश हुआ कि गोरखपुर जेल में बंद आजमगढ़ के अपराधी श्याम बाबू ने जहानागंज क्षेत्र के कारोबारी अजय सिंह से 25 लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी। न देने पर उसके गुर्गे राजन ने अजय की दुकान पर चढ़कर फायरिंग कर दी।

रंगदारी न देने पर जान के लाले : पुलिस भले सुरक्षा का दावा करे, लेकिन बहुतों ने रंगदारी न देने पर जान भी गंवाई। 20 लाख रुपये रंगदारी न देने पर जनवरी में राजधानी में वुडलैंड के डीजीएम नितिन तिवारी, मेरठ में अभी कुछ दिन पहले डॉ. दिनेश शर्मा और मेरठ में ही पिछले साल केबल नेटवर्क के मैनेजर पवित्र मैत्रेय रंगदारी न देने पर अपनी जान गंवा चुके हैं।

बंदी रक्षक मुहैया कराते मोबाइल : कारागारों के आस-पास के कॉल डिटेल रिकार्ड का अवलोकन करने पर पुलिस ने पाया कि फर्जी नाम पते से लिए गये सिम वाला मोबाइल कैदियों और माफिया को बंदी रक्षक ही मुहैया कराते हैं और इसके एवज मे इनाम लेते हैं। यह बात पुलिस की पूछताछ में ही सामने आई।

संदिग्ध मुलाकातियों पर पुलिस की नजर

'पुलिस माफिया का नेटवर्क तोड़ने में लगी है। पुलिस की सक्रियता से लगातार अपराधी पकड़े जा रहे हैं। सूबे की जेलों पर संदिग्ध मुलाकातियों पर पुलिस की कड़ी नजर है।'

अरुण कुमार

अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर