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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 08, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कश्मीर : सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में 3 आतंकी ढेर, तनाव के चलते रेल सेवा पर विराम

By Kishor JoshiEdited By:
Published: Thu, 08 Dec 2016 10:09 AM (IST)Updated: Thu, 08 Dec 2016 05:06 PM (IST)

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच चली मुठभेड़ अब खत्म हो गई है।

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श्रीनगर (जेएनएन)। जम्मू-कश्मीर में अनंतनाग के हुसैनपोरा अरवनी में मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया है। मारे गए आतंकियों में लश्कर का कमांडर माजिद जरगर भी शामिल है। हालांकि संबंधित अधिकारी कह रहे हैं कि वहां चार आतंकी थे। अभी तलाशी अभियान जारी है।

हुसैनपोरा कुलगाम में मुठभेड को लेकर पैदा हुए कानून व्यवस्था के संकट को देखते हुए प्रशासन ने दक्षिण कश्मीर में मोबाइल सेवाएं बंद करने के बाद अब बडगाम से बनिहाल तक रेलसेवा को भी अगले आदेश तक बंद कर दिया। मुठभेड़ में तीन आतंकियों के मारे जाने की खबरों से फैले तनाव को देखते हुए प्रशासन ने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम में मोबाइल सेवा को अगले आदेश तक बंद कर दिया है।

लश्कर कमांडर अबू दुजाना के बारे में संबधित अधिकारियों का कहना है कि मकान का मलबा हटाया जाना है, हो सकता है कि वह मारा गया हो और उसका शव नीचे दबा हो। आतंकियों का ठिकाना बने मकान की तलाशी ली जा रही है। गांव में तीन से चार आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर तलाशी अभियान चलाया गया था। अभी तक तीन ही शव मिले हैं।

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गौरतलब है कि अबु दुजाना वादी में गत चार वर्षों से सक्रिय है। वह अगस्त 2015 में श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर बीएसएफ काफिले पर हुए हमले की साजिश में भी शामिल था और अबु कासिम के मारे जाने के बाद लश्कर ने उसे दक्षिण कश्मीर की कमान सौंपी थी। जुलाई में आतंकी बुरहान के जनाजे में भी वह शामिल हुआ था और उसके बाद 31 जुलाई को भी वह करीमाबाद पुलवामा में आयोजित एक भारत विरोधी रैली में शामिल हुआ था।

अक्टूबर 2015 से सितंबर 2016 तक श्रीनगर से अनंतनाग तक जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षाबलों पर अधिकांश हमलों का वही मुख्य सूत्रधार रहा है। श्रीनगर के निकट स्थित इडीआई परिसर पर इस साल हुए दो आत्मघाती हमलों की योजना भी उसने ही तैयार की थी। श्रीनगर जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुजाना द्वारा रचे गए आतंकी हमलों में लगभग 20 सुरक्षाकर्मी एक साल में मारे गए हैं। गिलगित बाल्टिस्तान का रहने वाले दुजाना के जिंदा अथवा मुर्दा पकड़े जाने पर 10 लाख का ईनाम है।

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