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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 12, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

इनोवेटिव होगा देश का पहला केंद्रीय महिला विश्वविद्यालय

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Published: Fri, 12 Jul 2013 07:58 PM (IST)Updated: Fri, 12 Jul 2013 08:18 PM (IST)

नई दिल्ली [राजकेश्वर सिंह]। देश के पहले महिला केंद्रीय विश्वविद्यालय को रायबरेली में खोलने की वजहें राजनीतिक हो सकती हैं, ...और पढ़ें

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नई दिल्ली [राजकेश्वर सिंह]। देश के पहले महिला केंद्रीय विश्वविद्यालय को रायबरेली में खोलने की वजहें राजनीतिक हो सकती हैं, लेकिन वह अपने आप में कुछ खास होगा। सरकार का फोकस उसे इनोवेटिव [नवोन्वेषी] विश्वविद्यालय बनाने पर है। विश्वविद्यालय में प्राकृतिक, सामाजिक विज्ञान, साइंस और मानविकी की पढ़ाई तो होगी ही, साथ ही इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी और मेडिकल की भी पढ़ाई के मौके होंगे। जबकि, उच्चस्तरीय शोध पर भी जोर दिया जाएगा।

पूरी तरह महिलाओं की उच्च शिक्षा को समर्पित इस विश्वविद्यालय से दूसरे कॉलेजों की संबद्धता तो नहीं हो सकेगी। अलबत्ता, उसे अपना खुद का कॉलेज खोलने और उसे संचालित करने का अधिकार होगा। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली जिले की लालगंज तहसील के बसिगवां और सदर तहसील के गोझारी गांव की जमीन पर खुलने वाले इस विश्वविद्यालय के अखिल भारतीय स्वरूप, शिक्षण और अनुसंधान के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए दाखिले संयुक्त प्रवेश परीक्षा और मेरिट के जरिये होंगे। इसके अलावा छात्रों की पढ़ाई के लिए सेमेस्टर प्रणाली लागू करना, सतत मूल्याकंन, विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली लागू करने, क्रेडिट ट्रांसफर, संयुक्त डिग्री को शुरू करने जैसी पहल भी विश्वविद्यालय करेगा।

जहां तक इस विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं का सवाल है तो अकादमिक कार्यकलापों में उनकी भागीदारी होगी और उन्हें फैकल्टी के मूल्याकंन की भी छूट होगी। देश के राष्ट्रपति विश्वविद्यालय के विजिटर होंगे, जबकि कुलपति की नियुक्ति के लिए बनने वाली सर्च कम [सह] सेलेक्शन कमेटी के पांच सदस्यों में दो विजिटर द्वारा नामांकित होंगे और तीन को कार्यकारी परिषद नामित करेगी। इस महिला विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति, कार्यकारी परिषद, शैक्षिक परिषद, अध्ययन बोर्ड और वित्त समिति आदि में पुरुष पदाधिकारियों को भी रखा जा सकेगा, लेकिन इन सबमें महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

रायबरेली में ही देश के इस पहले केंद्रीय महिला विश्वविद्यालय को खोलने के पीछे सरकार [मानव संसाधन विकास मंत्रालय] का तर्क है कि यह जिला शैक्षिक रूप से पिछड़ा हुआ है। दूसरी बात कि यह देश की पहली महिला प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी की कर्मभूमि [संसदीय क्षेत्र] रही है, जो महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है। मंत्रालय का यह भी मानना है कि चूंकि रायबरेली प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलावा इलाहाबाद, कानपुर और किसी हद तक वाराणसी से भी नजदीक है। इन शहरों से रेल व सड़क मार्ग से जुड़ाव के कारण छात्रों, फैकल्टी आदि आसानी से वहां पहुंच सकेंगे। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री जितिन प्रसाद का कहना है, महिलाओं के लिए मॉडल यह विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में नये मानक स्थापित करेगा। संप्रग सरकार का यह निर्णय राष्ट्रनिर्माण व महिलाओं के सशक्तिकरण के मामले में मील का पत्थर साबित होगा।

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