पूर्वोत्तर के लोगों को हक दिलाने को कर रहीं संघर्ष
देश के विभिन्न भागों खासकर महानगरों में रहने वाले पूर्वोत्तर के लोगों को कई तरह की अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में दिल्ली में रह रहीं मणिपुर की डॉ. एलेना रोंगमई पिछले आठ वर्षो से पूर्वोत्तर के लोगों के लिए लड़ाई लड़कर उनकी मदद कर रही हैं। एलेना वर्ष 2007 से पूर्वोत्तर के लोगों के लिए हेल्पलाइन सेंटर चलाती हैं। उनके छह दोस्त भी इससे जुड़े हुए हैं। इनमें से कोई वकील है तो कोई डॉक्टर, जो उनकी मदद करते हैं।
नई दिल्ली [अमित कसाना]। देश के विभिन्न भागों खासकर महानगरों में रहने वाले पूर्वोत्तर के लोगों को कई तरह की अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में दिल्ली में रह रहीं मणिपुर की डॉ. एलेना रोंगमई पिछले आठ वर्षो से पूर्वोत्तर के लोगों के लिए लड़ाई लड़कर उनकी मदद कर रही हैं। एलेना वर्ष 2007 से पूर्वोत्तर के लोगों के लिए हेल्पलाइन सेंटर चलाती हैं। उनके छह दोस्त भी इससे जुड़े हुए हैं। इनमें से कोई वकील है तो कोई डॉक्टर, जो उनकी मदद करते हैं।
हाईकोर्ट से मिला न्याय
रिसर्च फैलो एलेना ने कई लोगों को न्याय दिलाया है। वर्ष 2009 में चिराग दिल्ली में पांच साल की एक बच्ची से दुष्कर्म हुआ था। उसके माता-पिता पूर्वोत्तर से काफी पहले ही दिल्ली आ गए थे और मजदूरी करते थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते पुलिस उनकी बात नहीं सुन रही थी। काफी जद्दोजहद के बाद पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन पुलिस की हल्की चार्जशीट के चलते आरोपी निचली अदालत से बरी हो गया। लेकिन इसे बाद वह मामले को हाईकोर्ट तक लेकर गईं, जहां से बच्ची को न्याय मिला।
आरोपी की मदद कर रही थी पुलिस
मुनिरका में एक आइआइटी प्रोफेशनल ने पूर्वोत्तर की लड़की से दुष्कर्म किया। पुलिस आरोपी को मानसिक रूप से बीमार बताकर उसे बचा रही थी, लेकिन उन्होंने मामले को पुलिस के आलाधिकारियों के समक्ष रखा और युवती को न्याय दिलाया।
पूर्वोत्तर के लोगों को न्याय मिले एलेना के अनुसार हाल ही में गुड़गांव स्थित एक कंपनी में काम करने वाले पूर्वोत्तर के 16 ऐसे लोग उनके संपर्क में आए जिन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। कंपनी उनके पैसे भी नहीं दे रही थी। शिकायत पत्र देकर व पुलिस प्रशासन समेत जनप्रतिनिधियों से संपर्क करने के बाद उन्होंने कंपनी के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया।
लोगों की नीयत गलत
एलेना कहती हैं कि शुरुआत में बड़ी परेशानी आती थी। किसी पुलिस थाने व प्रशासनिक अधिकारी के पास जाने पर केवल आश्वासन मिलता था। कुछ लोग तो धमकी देकर कार्यालयों से भगा देते थे। वहीं, अक्सर आरोपी स्थानीय लोग होते हैं। इसके चलते उनका प्रभाव स्थानीय प्रशासन पर होता है। ऐसे में परेशानी हुई लेकिन समस्या के समाधान तक पहुंचने के मकसद ने हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। एलेना कहती हैं कि पूर्वोत्तर के लोगों का शोषण यहां के लोगों की सोच बन चुकी है। लड़कियां को लेकर उनके मन में एक छवि है कि वह स्कर्ट-टीशर्टपहने, हाथ में टैटू गुदवाए उनकी शारीरिक जरूरत का सामान भर है। इस मानसिकता को बदलने की जरूरत है।
रोज आती हैं 35 शिकायतें
एलेना के पास रोजाना करीब 30-35 शिकायतें आती हैं। शिकायतों में मकान मालिक द्वारा तंग करना, शारीरिक शोषण, नौकरी में उत्पीड़न आदि होती हैं। कई मामले गंभीर नहीं होते जो आपसी सूझबूझ से खत्म हो जाते हैं। इसके बाद जिनमें शिकायत की जरूरत होती है, शिकायत की जाती है नहीं तो कानूनी मदद की जाती है। वह दिल्ली-एनसीआर में पूर्वोत्तर के लोगों के लिए काम कर रहीं अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर वहां के लोगों की मदद करती हैं।
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