Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    अभाव के बयार में भी जलते हैं सफलता के दीप

    By Edited By:
    Updated: Tue, 12 Aug 2014 08:49 AM (IST)

    अगर आपके भीतर सच्ची लगन और मेहनत करने का जज्बा है, तो सफलता एक दिन आपके कदम जरूर चूमेगी। ऐसे तमाम लोग हैं जिन्होंने अभावों के बावजूद मेहनत के बल पर सफलता हासिल की है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं सिराजुद्दीन कुरैशी। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा वर्ष 2011 में विश्वभर से आमंत्रित कुछ चुनिंदा लोगों

    नई दिल्ली, [अमित कसाना]। अगर आपके भीतर सच्ची लगन और मेहनत करने का जज्बा है, तो सफलता एक दिन आपके कदम जरूर चूमेगी। ऐसे तमाम लोग हैं जिन्होंने अभावों के बावजूद मेहनत के बल पर सफलता हासिल की है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं सिराजुद्दीन कुरैशी। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा वर्ष 2011 में विश्वभर से आमंत्रित कुछ चुनिंदा लोगों में शामिल सिराजुद्दीन कुरैशी का पुरानी दिल्ली की गलियों से निकलकर अमेरिका के व्हाइट हाउस तक का सफर कड़ी मेहनत व संघर्ष से भरा रहा है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    सिराजुद्दीन का जन्म पुरानी दिल्ली के कसाबपुरा में हुआ था। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते शुरुआती पढ़ाई मदरसे में की। किशोरावस्था से ही उन्होंने मजदूरी करना शुरू कर दिया था। फुटपाथ पर बर्फ, फूल, फल, शरबत बेचने के साथ-साथ पढ़ाई भी चलती रही। पढ़ने की ललक ने किरोड़ीमल कॉलेज फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ फैक्ल्टी तक पहुंचाया।

    गरीब छात्रों को पढ़ाना मकसद

    इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर के अध्यक्ष व हिंद एग्रो इंडस्ट्री कंपनी के मालिक सिराजुद्दीन कुरैशी हर वर्ष कंपनी का कुछ फीसद मुनाफा अपनी नोबेल एजुकेशन फाउंडेशन व नोबेल ट्रस्ट फाउंडेशन नामक गैर सरकारी संस्थान के माध्यम से सैंकड़ों छात्रों को पढ़ाने-लिखाने पर खर्च करते हैं। संस्था अब तक करीब 10 हजार छात्रों को पर्सनेलिटी डेवलपमेंट कोर्स, मेमोरी डेवलपमेंट कोर्स व कंप्यूटर से जुड़े अन्य रोजगारपरक कोर्स करवा चुकी है। अब तक करीब 60 फीसद छात्र विभिन्न मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी पा चुके हैं।

    आई कई अड़चनें

    कुरैशी बताते हैं कि जब वह शुरू-शुरू में स्लम बस्तियों में लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए जाते थे तो लोग मजाक उड़ाते थे। गरीबी के चलते लोग बच्चों को पढ़ाने के बजाए कामधंधे में डालना उचित समझते थे। उन्होंने कहा कि पहले कुछ बच्चों का समूह बनाया और उनके पढ़ाई का खर्चा उठाया।

    कारोबार में मिली सफलता ने पहुंचाया व्हाइट हाउस

    कुरैशी ने बताया कि जब कंपनी खोली तो कारोबार में सफलता मिलती चली गई। कारोबार में मिली तरक्की के बदौलत वर्ष 2011 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए व्हाइट हाउस की ओर से निमंत्रण भेजा गया था। जिसमें विश्वभर से चुने हुए व्यवसायी भी आए हुए थे।

    स्वतंत्रता के सारथी से संबंधित समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

    हौसलों को पंख देने की कोशिश