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    जिंदगी के 'सरोवर' में शिक्षा का 'कमल'

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    Updated: Fri, 08 Aug 2014 01:25 PM (IST)

    कहते हैं शिक्षा ही जिंदगी जीने का सलीका सिखाती है। यदि शिक्षा नहीं है, तो जिंदगी बेकार है। इसी सोच को अपनी जिंदगी में उतार लिया है प्रोफेसर केके दीवान ने। अंग्रेजी विभागाध्यक्ष से सेवानिवृत्त इस शख्स को एक ही धुन है, समाज में शिक्षा का उजियारा फैलाना।

    मैनपुरी,(भुवनेश त्रिपाठी)। कहते हैं शिक्षा ही जिंदगी जीने का सलीका सिखाती है। यदि शिक्षा नहीं है, तो जिंदगी बेकार है। इसी सोच को अपनी जिंदगी में उतार लिया है प्रोफेसर केके दीवान ने। अंग्रेजी विभागाध्यक्ष से सेवानिवृत्त इस शख्स को एक ही धुन है, समाज में शिक्षा का उजियारा फैलाना।

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    शहर के पंजाबी कॉलोनी निवासी 74 वर्षीय कमल कृष्ण दीवान मूलरूप से रहने वाले तो लखनऊ के हैं। लेकिन आधी सदी मैनपुरी में काट दी। 21 साल की उम्र में एमए करने के बाद उन्हें वर्ष 1961 में मेरठ के बड़ौत में जाट वैदिक कॉलेज में प्रोफेसर की नौकरी मिली। तीन साल यहां रहे। फिर मैनपुरी के चित्रगुप्त महाविद्यालय में बतौर अंग्रेजी विभागाध्यक्ष के रूप में ज्वाइन कर लिया। तभी से प्रोफेसर दीवान यहीं के होकर रह गए। 36 साल विभागाध्यक्ष रहे प्रोफेसर दीवान 30 जून 2000 को सेवानिवृत्त हो गए। रटायरमेंट के बाद चाहते, तो पेंशन से आराम की जिंदगी गुजारते। लेकिन मन में समाज को शिक्षित करने की ऐसी धुन सवार थी कि सेवानिवृत्ति के बाद एमए के छात्र-छात्रओं के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वालों को ट्यूशन पढ़ाने लगे।

    समाज को शिक्षित करने की उनमें ऐसी लगन है कि वर्ष 2000 से फीस नहीं बढ़ाई है। वह एक ट्यूशन को प्रतिमाह जितनी फीस लेते हैं, उससे चार गुना ज्यादा नर्सरी के बच्चों की फीस अभिभावक दे रहे हैं। प्रोफेसर दीवान कहते हैं कि चाहता तो फीस बढ़ाकर पैसा बहुत कमाता, लेकिन पैसा ही सब कुछ नहीं है। जितने बच्चे पढ़ जाएंगे, देश के विकास में उनका भी योगदान होगा। सुबह और शाम की एक -एक घंटे ट्यूशन की क्लास घर पर ही चलती है। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को वे निशुल्क पढ़ाते हैं।

    हां, इसके पहले वह बच्चे का टैलेंट देखते हैं। वह कहते हैं कि अब उम्र के ऐसे पड़ाव पर हूं, जहां जितना हो सके समाज में ज्ञान बांट सकूं। दो बेटों में एक अंशुल चंडीगढ़ की फार्मास्यिुटिकल फर्म में एक्जीक्यूटिव है तो दूसरा अभिषेक गुड़गांव में एक मल्टी नेशनल कंपनी में कार्यरत। बेटी कविता अपने परिवार के साथ इंग्लैड में रहती है। पत्नी उर्मिला जंतु विज्ञान से एमएससी हैं।

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