Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    मजदूरों के हित के लिए खर्च होंगे 12 सौ करोड़ रुपये

    By Edited By:
    Updated: Mon, 06 Jan 2014 10:23 AM (IST)

    नई दिल्ली [राज्य ब्यूरो]। मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजनाएं बनाने के नाम पर दिल्ली की पूर्व शीला दीक्षित सरकार ने लगभग 12 सौ करोड़ रुपये इकट्ठा किया था, लेकिन इस पैसे का इस्तेमाल नहीं किया। अब आम आदमी पार्टी [आप] की सरकार इसी पैसे का इस्तेमाल कर दिल्ली में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और श्रमिकों के लिए कई योजनाएं बनाने पर

    नई दिल्ली [राज्य ब्यूरो]। मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजनाएं बनाने के नाम पर दिल्ली की पूर्व शीला दीक्षित सरकार ने लगभग 12 सौ करोड़ रुपये इकट्ठा किया था, लेकिन इस पैसे का इस्तेमाल नहीं किया। अब आम आदमी पार्टी [आप] की सरकार इसी पैसे का इस्तेमाल कर दिल्ली में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और श्रमिकों के लिए कई योजनाएं बनाने पर विचार कर रही है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    दिल्ली के श्रम मंत्री गिरीश सोनी के मुताबिक आप ने चुनाव के दौरान जारी अपने संकल्प पत्र में वादा किया था कि दिल्ली के श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए कई योजनाएं शुरू की जाएंगी। इस वादे को पूरा करने की कवायद शुरू कर दी गई है। सोनी ने बताया कि पिछली सरकार ने सितंबर 2002 में दिल्ली भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर कल्याण बोर्ड का गठन किया था। इसका उद्देश्य मजदूरों के हितों के लिए योजनाएं बनाकर कार्यान्वित करना था।

    पढ़ें : 'आप' की मंत्री राखी बिड़ला की कार पर हमला

    इसके लिए दिल्ली में अलग-अलग निर्माण कार्य कर रहीं एजेंसियों और कंपनियों पर सैस लगाया गया व सैस से एकत्र राशि बोर्ड के पास जमा कराई गई। सोनी के मुताबिक नवंबर 2013 तक बोर्ड के पास लगभग 1256 करोड़ रुपया जमा हो चुका था, जबकि बोर्ड ने केवल 37.41 करोड़ रुपये ही खर्च किए थे। अब बोर्ड के अधिकारियों से कहा गया है कि वह दिल्ली में निर्माण मजदूरों की जानकारी एकत्र करें और साथ ही उनके लिए अलग-अलग योजनाएं बनाएं, ताकि इस पैसे का सदुपयोग हो सके।

    सोनी के मुताबिक आप के घोषणा पत्र में यह भी वादा किया गया था कि दिल्ली में ठेकेदारी प्रथा समाप्त की जाएगी। इसके मद्देनजर श्रम विभाग ने दिल्ली में ठेका प्रथा के तहत काम कर रहे मजदूरों के आंकड़े एकत्र करना शुरू कर दिया है। सभी सरकारी विभागों से कहा गया है कि वे अपने विभाग में काम कर रहे ठेका कर्मचारियों की सूची सरकार को दें। उन्होंने कहा कि आंकड़े सामने आने के बाद लंबे समय से ठेके पर काम कर रहे लोगों को नियमित करने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए बकायदा योजना बनानी होगी, जिस पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा।

    मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर