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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 11, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सुब्रत राय सहारा को झटका,मिराच सौदा रद्द

By Test2 test2Edited By:
Published: Wed, 11 Feb 2015 08:03 PM (IST)Updated: Wed, 11 Feb 2015 08:57 PM (IST)

आखिर वही हुआ जिसकी आशंका थी। अमेरिकी कंपनी मिराच से लोन व्यवस्था के तहत सहारा समूह को रकम मिलने की ...और पढ़ें

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न्यूयॉर्क । आखिर वही हुआ जिसकी आशंका थी। अमेरिकी कंपनी मिराच से लोन व्यवस्था के तहत सहारा समूह को रकम मिलने की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फिर चुका है। कर्ज सौदे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच अमेरिकी कंपनी ने इसे रद करने का एलान किया है। सौदे की जांच-पड़ताल से जुड़ी पूरी 26.25 लाख डॉलर की फीस भी लौटा दी है। यह और बात है कि मिराच भारतीय समूह के तीनों होटलों की एकमुश्त खरीद के लिए 2.05 अरब डॉलर की पेशकश करना चाहती है।

भारतीय मूल के सारांश शर्मा के नेतृत्व वाली मिराच कैपिटल ने कहा कि भारतीय समूह 'अनिच्छुक विक्रेता' बना हुआ है। करीब एक साल से जेल में बंद सहारा प्रमुख सुब्रत राय को छुड़ाने के लिए समूह के प्रयासों के बीच मिराच सामने आई थी। लेकिन, 2.05 अरब डॉलर का फाइनेंसिंग से जुड़ा सौदा 'फर्जी पत्र' विवाद में फंस गया।

बयान जारी कर मिराच ने कहा कि उसने 26.25 लाख डॉलर की राशि सेबी-सहारा फंड को भेज दी है। साथ ही सहारा समूह को कर्ज देने का प्रस्ताव रद कर दिया है। इसमें विदेश में स्थित तीन होटलों केलिए समूह की ओर से बैंक ऑफ चाइना से लिए गए लोन को निवेशकों के नए समूह को ट्रांसफर किया जाना शामिल है। इन होटलों में द प्लाजा और ड्रीम डाउनटाउन न्यूयॉर्क में तथा ग्रॉसवेनर हाउस लंदन में है।

मिराच ने कहा है कि सहारा के साथ 10 दिसंबर, 2014 के करार के तहत वह कानूनी, अकाउंटिंग तथा लेनदेन संबंधी शुल्क सहारा से लेने की हकदार थी। लेकिन, अपने ऊपर लगे 'निराधार आरोपों' को देखते हुए पुरानी बातों को भुला नई शुरुआत करने के इरादे से धन लौटाया है। यह अलग बात है कि मामले में उस पर 10,75,000 डॉलर का खर्च आया है। लेकिन इसे लौटाने का मकसद सुप्रीम कोर्ट को यह दिखाना है कि अमेरिकी कंपनी लागत वहन करने को तैयार है। उसे 20 फरवरी को निष्पक्ष फैसले का इंतजार है। कोर्ट ने सहारा-मिराच सौदे को पूरा करने के लिए 20 फरवरी तक का समय दिया है।

-कैसे शुरू हुआ विवाद-

भारतीय समूह ने मिराच पर उससे फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया था। यह विवाद बैंक ऑफ अमेरिका (बीओएफए) के एक फर्जी पत्र को लेकर शुरू हुआ। इसे सौदे की गारंटी के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश किया गया था। हाल ही बीओएफए ने साफ किया था कि उसका इस सौदे से लेनादेना नहीं है। इसी के बाद धोखेधड़ी की बात सामने आई थी। मिराच ने पलटवार करते हुए सहारा समूह पर आरोप लगाए थे। उसका कहना था कि जमानत के लिए अदालत की शर्त के बावजूद सहारा हमेशा से ही इन संपत्तियों की बिक्री करने का अनिच्छुक रहा है।

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