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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 11, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बंगाल में लड़ी जाएगी बिहार की लड़ाई, भाजपा के खिलाफ बन रहे हैं दो मोर्चे

By Rajesh KumarEdited By:
Published: Fri, 11 Mar 2016 09:32 PM (IST)Updated: Sat, 12 Mar 2016 09:18 AM (IST)

चुनाव पश्चिम बंगाल में है, लेकिन रणनीतियां बना रहे हैं बिहार के नेता। कांग्रेस और वामदलों के साथ तालमेल कराने ...और पढ़ें

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अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। चुनाव पश्चिम बंगाल में है, लेकिन रणनीतियां बना रहे हैं बिहार के नेता। कांग्रेस और वामदलों के साथ तालमेल कराने में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अहम भूमिका है। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस विरोधी इस मोर्चे में लालू प्रसाद को भी शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है। जाहिर है, पड़ोसी राज्य की सियासी लड़ाई में बिहार-झारखंड के नेताओं की भूमिका अहम होगी। ऐसे में नीतीश कुमार के रणनीतिकार प्रशांत किशोर का किरदार भी महत्वपूर्ण होगा। लालू भी बिहार से बाहर निकलने के लिए पश्चिम बंगाल को मौके की तरह देख रहे हैं। भाजपा भी झारखंड की सियासी ताकत को पश्चिम बंगाल में झोंक सकती है।

बिहार में महागठबंधन की जीत के बाद 20 नवंबर 2015 को नीतीश सरकार के शपथ समारोह में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी पहुंची थीं। समारोह के बाद ममता ने लालू प्रसाद के आवास पर जाकर राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ बड़े मोर्चे का संकेत दिया था। पांच राज्यों में चुनाव के ऐलान के बाद ताजा हालात बता रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में ममता और नीतीश ने अलग-अलग जोर आजमाने की पूरी तैयारी कर रखी है।

नीतीश कांग्रेस और वामदलों के गठबंधन के साथ खड़े हो गए हैं। राजद प्रमुख लालू प्रसाद का स्टैंड अभी तक साफ नहीं है, किंतु नीतीश की पहल पर कांग्रेस और वामदलों के गठबंधन ने लालू को भी मोर्चे में आमंत्रित किया है।

जाहिर है, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और भाजपा के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा बनाने की पहल की जा रही है।

भाजपा भी बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे से सबक लेकर पश्चिम बंगाल में प्रवेश करेगी। लोकसभा चुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस और वामदलों के गढ़ में भाजपा के वोट में इजाफे के पीछे बिहारी आबादी का बड़ा योगदान था। तब भाजपा को राज्य में 16.68 फीसद वोट मिले थे। राज्य की 294 सीटों में 24 पर भाजपा का एक नंबर प्रदर्शन रहा था, जबकि 28 सीटों पर उसके प्रत्याशी दूसरे नंबर पर थे।

इस तरह भाजपा की नजर उन सभी सीटों पर है जिन पर वह नंबर वन एवं नंबर टू की स्थिति में रही थी। ऐसी सीटों की संख्या 52 है। बेहतर प्रदर्शन के जरिए भाजपा इन सीटों पर कब्जा जमाने की कोशिश करेगी।

बिहार-झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में भाजपा का विशेष फोकस रहेगा। झारखंड से सटे आसनसोल से जीतकर बाबुल सुप्रियो केंद्र में मंत्री भी बनाए गए हैं। झारखंड में बड़ी संख्या में बंगाली आबादी भी है। शिबू सोरेन की पार्टी झामुमो पश्चिम बंगाल में खासा असर रखती है। इसके पहले के चुनाव में वहां कुछ सीटें भी जीतती रही है। ऐसे में बंगाल की चुनावी हवा से पड़ोसी राज्य अप्रभावित नहीं रहेंगे।