बाल ठाकरे की वसीयत पर दो पुत्रों में भिड़ंत
शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की वसीयत को लेकर उनके दो पुत्रों में कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। उनके दूसरे पुत्र जयदेव ठाकरे ने वसीयत को नकली बताते हुए उसे कोर्ट में चुनौती दी है। ठाकरे के दो पुत्रों के बीच यह कानूनी जंग तब शुरू हुई, जब उनके छोटे पुत्र एवं शिवसेना के वर्तमान अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने अपने पिता की
मुंबई [राज्य ब्यूरो]। शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की वसीयत को लेकर उनके दो पुत्रों में कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। उनके दूसरे पुत्र जयदेव ठाकरे ने वसीयत को नकली बताते हुए उसे कोर्ट में चुनौती दी है।
ठाकरे के दो पुत्रों के बीच यह कानूनी जंग तब शुरू हुई, जब उनके छोटे पुत्र एवं शिवसेना के वर्तमान अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने अपने पिता की वसीयत को अमल में लाने के लिए बांबे हाई कोर्ट में प्रोबेट याचिका दायर की। इस याचिका को उद्धव के बड़े भाई जयदेव ने चुनौती दी है। जयदेव का कहना है कि वसीयत पर दी गई तारीख एवं उसकी भाषा को देखते हुए नहीं लगता कि यह वसीयत उनके पिता द्वारा लिखवाई गई होगी। अंग्रेजी में लिखी वसीयत पर स्वर्गीय बाल ठाकरे के हस्ताक्षर मराठी में हैं। जयदेव का तर्क है कि जिंदगी भर मराठी मानुष के लिए संघर्ष करते रहे उनके पिता अपनी वसीयत अंग्रेजी में नहीं लिखवा सकते। ठाकरे के हस्ताक्षर पर भी जयदेव ने यह कहते हुए सवाल उठाया है कि वसीयत पर दी गई तारीख को उनके पिता इतने बीमार थे कि वह हस्ताक्षर करने की स्थिति में ही नहीं थे।
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अपने पिता के जीवनकाल से ही उनसे अलग रह रहे जयदेव को इस ंवसीयत पर आपत्ति इसलिए है क्योंकि वसीयत के अनुसार बाल ठाकरे ने अपनी सारी संपत्ति सिर्फ उद्धव ठाकरे को ही देने की बात कही है। शेष दो पुत्रों स्वर्गीय बिंदुमाधव के परिवार एवं जयदेव ठाकरे को वसीयत में कुछ भी नहीं दिया गया है। सूत्रों के अनुसार वसीयत में लिखा गया है कि मैं अपने दूसरे पुत्र जयदेव से बहुत प्यार करता हूं। वह बहुत बुद्धिमान भी है। लेकिन दुर्भाग्य से वह बागी जैसा जीवन जीता रहा है। काफी समय पहले ही वह मातोश्री (ठाकरे का बांद्रा स्थित निवास) छोड़कर चला गया था। वह अपनी पहली पत्नी स्मिता से तलाक के बाद अपनी दूसरी पत्नी के साथ रह रहा है। उसके इस व्यवहार से मुझे बहुत कष्ट पहुंचा है। इसलिए मैं अपनी संपत्तियों में से कुछ भी उसके लिए नहीं छोड़ रहा हूं। ठाकरे ने एक दुर्घटना में मारे जा चुके अपने बड़े पुत्र बिंदुमाधव के परिवार के लिए भी कुछ नहीं छोड़ा है। कथित वसीयत में उन्होंने बिंदुमाधव की पत्नी के खराब व्यवहार का हवाला देते हुए उसके मातोश्री में रहने पर उद्धव की शांति भंग होने की आशंका जताई है। जयदेव ने कोर्ट से मांग की है कि ठाकरे की पूरी संपत्ति का बंटवारा उनके तीनों पुत्रों अथवा उनके परिवारों के बीच समान रूप से किया जाना चाहिए।
संपत्तियों के मूल्यांकन पर सवाल :
जयदेव ने उद्धव द्वारा कोर्ट में पेश वसीयत में दी गई ठाकरे की सभी संपत्तियों के मूल्यांकन पर सवाल खड़ा किया है। उद्धव की तरफ से ठाकरे की सभी संपत्तियों की कुल कीमत 14.85 करोड़ बताई गई है। जबकि जयदेव का कहना है कि ठाकरे का बांद्रा स्थित बंगला ही 40 करोड़ रुपये से कम का नहीं है। कई अन्य स्थानों पर स्थित बंगलों, फार्म हाउसों, दादर स्थित शिवसेना भवन एवं शिवसेना के मुखपत्र सामना इत्यादि की कुल कीमत 100 करोड़ से अधिक हो सकती है।
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