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    हरियाणा के निजी अस्पतालों में रेफर कोरोना मरीजों के इलाज का खर्च नहीं दे रही सरकार, हाई कोर्ट पहुंचा अस्पताल प्रबंधन

    By Kamlesh BhattEdited By:
    Updated: Sat, 27 Mar 2021 09:39 AM (IST)

    हरियाणा सरकार द्वारा कोविड-19 रोगियों का इलाज करने वाले निजी अस्पतालों की प्रतिपूर्ति नहीं देने पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने शुक्रवार को हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। इस संबंध में राधाकिशन अस्पताल थानेसर ने याचिका दायर की है।

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    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

    जेएनएन, चंडीगढ़। नीति आयोग की वीके पाल समिति की सिफारिश के अनुसार राज्य सरकार द्वारा कोविड-19 रोगियों का इलाज करने वाले निजी अस्पतालों की प्रतिपूर्ति नहीं देने पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने शुक्रवार को हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। हाई कोर्ट ने यह जवाब कुरुक्षेत्र जिले के राधाकिशन अस्पताल थानेसर द्वारा दायर याचिका पर मांगा है।

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    राधाकिशन अस्पताल ने राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग पर नीति आयोग की वीके पाल समिति की सिफारिश के अनुसार कोविड -19 रोगियों का इलाज करने वाले निजी अस्पतालों की प्रतिपूर्ति नहीं करने का आरोप लगाया गया। याचिकाकर्ता अस्पताल ने हरियाणा सरकार से आयोग की समिति की सिफारिशों के अनुसार उसके पास सामान्य अस्पताल से रेफर किए गए 226 कोविड-19 रोगियों का इलाज करने की एवज में वास्तविक लागत के भुगतान की मांग की है।

    याची अस्पताल ने हाई कोर्ट में सरकार पर आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार द्वारा निजी अस्पतालों को दी जा रही प्रतिपूर्ति मनमानी है। ऐसे अस्पतालों द्वारा की जाने वाली वास्तविक लागत का एक अंश मात्र है।याचिकाकर्ता अस्पताल ने कोर्ट को बताया कि उसने 226 रोगियों का इलाज किया था, जिस पर 3,87,36156 रुपये की राशि खर्च की गई थी।

    याचिका में दावा किया गया है कि 8 जून, 2020 को बनी आयोग की पाल समिति की सिफारिशों के अनुसार, इन रोगियों के उपचार के लिए प्रतिपूर्ति की जाने वाली राशि 3,52,46180 रुपये है, लेकिन राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता अस्पताल को केवल 95,59,440 रुपये की प्रतिपूर्ति की है। हाई कोर्ट ने कहा कि यह एक व्यापक विषय है। हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को 22 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

    फर्जीवाड़ा कर रहे कुछ प्राइवेट अस्पताल

    हरियाणा के सीएम मनोहर लाल का कहना है कि हमारी जानकारी में आया है कि कोविड के मरीजों के इलाज के नाम पर कुछ अस्पताल भारी फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। इन अस्पतालों की वजह से बाकी वास्तविक रूप से इलाज करने वाले अस्पतालों को भी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। हमारे संज्ञान में आया कि ऐसे प्राइवेट अस्पतालों ने अनाप-शनाप बिल बनाए हैं। ऐसे बहुत से प्रमाण सरकार के पास पहुंचे हैं। हम उनकी जांच करा रहे हैं।

    हरियाणा में 1322 नए मरीज, आठ की मौत

    वहीं, हरियाणा में कोरोना संक्रमण का फैलाव लगातार बढ़ रहा है। 1322 नए मामलों के साथ एक्टिव केसों की संख्या 7795 पर पहुंच गई है। राहत की बात यह है कि नूंह फिर कोरोना मुक्त हो गया है, जबकि पलवल कोरोना को हराने से महज तीन कदम दूर है। गत दिवस को प्रदेश के 20 जिलों में 1322 नए संक्रमित मिले। नूंह व रेवाड़ी में कोई नया संक्रमित नहीं मिला और भिवानी व चरखी दादरी में एक-एक संक्रमित मिला। गुरुग्राम में सर्वाधिक 269, करनाल में 204, पंचकूला में 131, पानीपत में 119, अंबाला में 105 तथा यमुनानगर में 88 संक्रमित मिले।

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    748 मरीज कोरोना को हरा कर घर लौटे। आठ मरीज कोरोना से सांसों की लड़ाई हार गए। मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 3125 पर पहुंच गया है। हरियाणा में रिकवरी रेट घटकर 96.17 फीसद पर पहुंच गया है और पाजिटिव रेट बढ़कर 4.64 हो गया है। इसके साथ ही मृत्युदर 1.10 फीसद पर पहुंच गई है। प्रत्येक दस लाख लोगों पर दो लाख 43 हजार 104 की जांच की जा रही है।

    स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने बताया कि प्रदेश में शुक्रवार को 40 हजार 878 लोगों को कोविड-19 की वैक्सीन दी गई। अब तक 13 लाख दो हजार 677 लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। वैक्सीन लगाने के लिए राज्य भर में 881 टीकाकरण केंद्र संचालित हैं, जिनमें से 669 सरकार द्वारा संचालित और 212 निजी केंद्र हैं।

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